⚫ भोलेनाथ की पुकार पर फिर कैलाश की ओर बढ़े डॉ. आशुतोष गुप्ता
आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने वाली पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाना हर शिव भक्त के जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य होता है। इस बेहद कठिन यात्रा पर वही जा पाता है जिसे भोलेनाथ स्वयं बुलाते हैं, पर कुछ भक्त ऐसे होते हैं जिन पर महादेव की असीम कृपा होती है जो अपनी असीम श्रद्धा, भक्ति और लगन के बल पुनः पावन कैलाश के दर्शन कर पाते हैं। ऐसे ही एक अनन्य भक्त हैं जनपद खीरी, छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ के सुप्रसिद्धि आर्थोपेडिक सृजन डॉ आशुतोष गुप्ता जिन्हें इस बार फिर पवित्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
गत वर्ष आठ जुलाई को उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे वाले मार्ग से डॉ आशुतोष गुप्ता पुत्र स्वर्गीय विजय कुमार गुप्ता एवं श्रीमती शकुंतला देवी, 22 दिवसीय कैलाश मानसरोवर की पावन यात्रा पर गये थे। इस वर्ष 13 अगस्त को नेपाल वाले मार्ग से डॉ आशुतोष गुप्ता कैलाश मानसरोवर की पावन यात्रा पर जा रहे हैं। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है, जबकि मानसरोवर झील को ब्रह्मा के मन से उत्पन्न माना जाता है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा न केवल हिंदुओं के लिए, बल्कि जैनियों और बौद्धों के लिए भी एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा है।
चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक की पावन यात्रा के अंतर्गत कैलाश पर्वत की अति दुरूह परिक्रमा भी करनी होती है, जिसमें शून्य तापमान और ऑक्सीजन की कमी वाले क्षेत्र में 52-55 किलोमीटर पैदल चलना होता है, जिसमें लगभग तीन दिनों का समय लगता है। इस यात्रा के लिए डॉ आशुतोष गुप्ता ने पूर्ववत तैयारियां की हैं जिनमें प्रतिदिन कई किलोमीटर चलना, नियमित संयमित खानपान और दिनचर्या, स्वास्थ्य संरक्षा एवं साथ ले जाने वाली सामग्रियों की व्यवस्थादि प्रमुख हैं।
भोलेनाथ के अनन्य भक्त डॉ आशुतोष गुप्ता इससे पूर्व भी पवित्र कैलाश मानसरोवर सहित बाबा अमरनाथ बर्फानी, केदारनाथ, रामेश्वरम, महाकाल आदि की तीर्थ यात्राएं कर चुके हैं। एक बार फिर पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर प्रस्थान से पूर्व डा आशुतोष को इष्ट मित्रों, परिवारजनों एवं विभिन्न समाज सेवियों द्वारा अपनी शुभेच्छाएं देकर हर्षोल्लास सहित रवाना किया जायेगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments