🔘 आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों ने एकजुट होकर भरी हक की हुंकार
लखनऊ। प्रदेश भर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों की एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक शनिवार को सम्पन्न हुई, जिसमें आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारियों के अधिकारों, श्रम कानूनों के अनुपालन तथा प्रस्तावित आउटसोर्सिंग सेवा निगम के गठन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया। बैठक में कर्मचारियों की पीड़ा, शोषण और उपेक्षा के विरुद्ध एक सशक्त और संगठित संघर्ष का संकल्प लिया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 16 सितम्बर 2025 को जारी आदेश के माध्यम से आउटसोर्सिंग सेवा निगम के गठन की घोषणा की गई थी, किन्तु महीनों बीत जाने के बाद भी यह व्यवस्था धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। कर्मचारियों को समय से मानदेय नहीं मिल रहा, जबकि ईएसआई और पीएफ की कटौती होने के बावजूद अनेक स्थानों पर इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ शून्य के बराबर है। कई कर्मचारियों को आज तक ईएसआई कार्ड तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। बैठक में यह भी चिंता व्यक्त की गई कि 1 अप्रैल 2025 से लागू श्रम विभाग की वेतनवृद्धि एवं श्रम कानून संबंधी व्यवस्थाओं का लाभ पात्र कर्मचारियों तक नहीं पहुंच रहा है।
शिकायतों, ज्ञापनों और विभिन्न स्तरों पर उठाए गए मुद्दों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बाजपेयी ने कहा कि यदि श्रम कानूनों का पालन ही नहीं होना है तो फिर उनके निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या है।
उन्होंने सवाल उठाया कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित क्यों हैं। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग सेवा निगम का गठन कब होगा, यह आज भी कर्मचारियों के लिए एक अनुत्तरित प्रश्न बना हुआ है। यदि सरकारी योजनाओं और विभागीय आंकड़ों के संकलन का कार्य होता है तो आउटसोर्सिंग कर्मचारी उसे दो दिनों में पूरा कर देते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान में महीनों और वर्षों का इंतजार कराया जाता है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 21 जून 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस एवं व्यापक रणनीतिक बैठक आयोजित की जाएगी। यदि कर्मचारियों के वैध अधिकारों और न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि संविधान सम्मत अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा और किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में ग्राम चौकीदार, पंचायत सहायक, आशा कार्यकर्ता, केयरटेकर, मीटर रीडर, धर्मकांटा कर्मचारी, 108 एवं 102 एम्बुलेंस कर्मचारी, बैंक मित्र, मनरेगा कर्मी, आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी तथा अन्य अल्प मानदेय प्राप्त कर्मचारी वर्गों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। पंचायत सहायकों को मात्र लगभग छह हजार रुपये मानदेय पर अनेक जिम्मेदारियां दिए जाने को भी गंभीर शोषण की श्रेणी में बताया गया।
ऑनलाइन बैठक में सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया कि उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी संघ, आउटसोर्सिंग वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन, कावा उत्तर प्रदेश, पंचायती कर्मचारी संघ तथा अन्य संगठनों के सभी पदाधिकारी समान सम्मान और समान भागीदारी के सिद्धांत पर एकजुट होकर कर्मचारियों के हितों की लड़ाई लड़ेंगे। किसी भी संगठन को छोटा या बड़ा नहीं माना जाएगा तथा
सभी संगठन आंदोलन और निर्णय प्रक्रिया में बराबर के सहभागी रहेंगे। बैठक में दीपक बाजपेयी, वैभव मिश्रा, अनूप मिश्रा, आबिद रिजवी, ब्रजेश कुमार मिश्रा, शिशिर सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का सार यही रहा कि वर्षों से उपेक्षा और असमानता झेल रहे लाखों आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी अब अपने अधिकारों, सम्मानजनक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए संगठित होकर निर्णायक संघर्ष का मार्ग चुन चुके हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब उनकी आवाज केवल मांग नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की पुकार बन चुकी है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments