⚫ भोलेनाथ के भोग पर भी ‘धक्का-मुक्की’ का पहरा! श्रद्धा की थाली लेकर गर्भगृह पहुंचे अग्रवाल सभा के सदस्यों से कथित दुर्व्यवहार
गोला गोकर्णनाथ। आस्था की नगरी गोला गोकर्णनाथ में मंगलवार को उस समय श्रद्धा और व्यवस्था आमने-सामने नजर आई, जब भगवान भोलेनाथ को भंडारे का भोग लगाने पहुंचे श्री अग्रवाल सभा के सदस्यों ने मंदिर के गर्भगृह में तैनात पुलिसकर्मियों पर कथित दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की करने के गंभीर आरोप लगाए। सदस्यों का कहना है कि भोग की थाली तक फेंक देने की धमकी दी गई, जिससे श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त हो गया।
बताया गया कि नगर के नीलकंठ मैदान में श्री अग्रवाल सभा विगत 9 वर्षों से निरंतर भंडारे का आयोजन करती आ रही है। प्रातः चाय तथा दोपहर में पूड़ी-सब्जी के भंडारे से पहले सभा के सदस्य परंपरानुसार भगवान भोलेनाथ को भोग अर्पित करते हैं। मंगलवार को करीब 10 बजे सदस्य भोग की थाली लेकर मंदिर पहुंचे। सभा के सदस्यों के अनुसार गर्भगृह में मौजूद पुलिसकर्मी मंदिर में प्रवेश कर रहे शिवभक्तों को धक्का देकर बाहर कर रहे थे। भोग लगाने पहुंचे सदस्यों ने जब बताया कि यह भंडारे का भोग है और इसके लिए एसडीएम की अनुमति भी है, फिर भी कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की जारी रही। सदस्यों का कहना है कि किसी तरह उन्होंने भगवान भोलेनाथ को भोग अर्पित किया और बाहर निकले। इसी दौरान भोग की थाली लेने पहुंचे मंदिर सेवादार सूरज के साथ भी कथित रूप से धक्का-मुक्की कर उसे बाहर किया गया। सभा के सदस्यों ने कहा कि घटना से संबंधित फुटेज मंदिर के कंट्रोल रूम में लगे कैमरों से देखी जा सकती है। घटना के बाद भोग लगाने पहुंचे सदस्य महेश कुमार पटवारी ने तत्काल पुलिस अधीक्षक कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारी को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। साथ ही विधायक अमन गिरि और नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला ‘रिंकू’ को भी मामले से अवगत कराया गया। सदस्यों के अनुसार जानकारी करने पर घटना के दौरान मैलानी थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार सिंह का नाम सामने आया। भोग लगाने वालों में पत्रकार महेश कुमार पटवारी, अतुल अग्रवाल, दौलत अग्रवाल, संजय गर्ग, प्रमोद पटवारी, आशीष अग्रवाल, नीरज गर्ग, शंकर अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, आयुष अग्रवाल सहित करीब आठ महिलाएं भी शामिल थीं। नौ वर्षों से चली आ रही सेवा-परंपरा में यदि श्रद्धा की थाली को भी धक्कों से गुजरना पड़े, तो सवाल केवल एक भंडारे का नहीं, बल्कि आस्था और व्यवस्था के बीच संवेदनशील समन्वय का बन जाता है। श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि शिवनगरी की पहचान श्रद्धा, सेवा और सौहार्द से बनी रहे।
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