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बुधवार, 24 जून 2026

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⚫ संकट की घड़ी में मददगार बने लायंस सेवी, बच गई जान

लखीमपुर खीरी। कभी-कभी जीवन ऐसे मोड़ पर आ खड़ा होता है, जहां हर पल कीमती हो जाता है और उम्मीद की डोर केवल इंसानियत के सहारे थमी रहती है। ऐसी ही एक मार्मिक घटना में समाजसेवियों की संवेदनशीलता, तत्परता और सेवा-भाव ने एक युवक को नया जीवन देने का काम किया।

गत सोमवार को एमजेएफ लायन सुरेंद्र कुमार तोलानी को सूचना मिली कि खीरी जनपद के नगरा-नीमगांव निवासी करन (पुत्र प्रमोद कुमार) एक गंभीर दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए हैं, लोहे की सरिया सीने के आर पार हो गई है। उनकी हालत चिंताजनक होने पर उन्हें तत्काल राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन जीवनरक्षा के लिए तत्काल रक्त की आवश्यकता थी। अस्पताल में चिंतित परिजनों की आंखों में बेबसी और मन में अपने प्रियजन को बचाने की व्याकुलता साफ दिखाई दे रही थी। इसी बीच करन के भाई विवेक ने एमजेएफ लायन सुरेंद्र कुमार तोलानी से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही श्री तोलानी ने मामले की गंभीरता को समझा और बिना एक क्षण गंवाए अपने साथी एमजेएफ लायन एच.एस. पहवा को अवगत कराया। मानव सेवा के संकल्प से जुड़े इन दोनों समाजसेवियों ने तत्काल लखनऊ में सक्रिय एमजेएफ लायन विनीत श्रीवास्तव से संपर्क साधा। इसके बाद सेवा और सहयोग की ऐसी श्रृंखला शुरू हुई कि कुछ ही समय में उपचार के लिए आवश्यक रक्त की व्यवस्था हो गई। समय पर रक्त उपलब्ध होने से चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया और करन की जान बचाने में सफलता प्राप्त की।

 बाद में जब यह सूचना मिली कि करन अब खतरे से बाहर हैं, तो परिजनों की आंखों में राहत और कृतज्ञता के आंसू छलक पड़े। करन के परिवार ने लायंस क्लब के इन सेवाभावी सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में उन्होंने केवल रक्त की व्यवस्था नहीं की, बल्कि एक परिवार की उम्मीदों को टूटने से बचा लिया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रक्तदान केवल रक्त का दान नहीं, बल्कि जीवनदान है। जब संवेदनशील लोग समाज की पीड़ा को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं, तब मानवता का सबसे सुंदर स्वरूप सामने आता है। लायंस सेवियों की यह पहल न केवल एक युवक के जीवन की रक्षा का कारण बनी, बल्कि समाज को सेवा, करुणा और परोपकार का प्रेरक संदेश भी दे गई।

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