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गुरुवार, 25 जून 2026

Lmp. दिव्यांगों की गोष्ठी में फूटा आक्रोश, पुनः जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

🔘 दिव्यांगों की गोष्ठी में फूटा आक्रोश, पुनः जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

लखीमपुर-खीरी। जब समाज का सबसे संवेदनशील वर्ग अपने ही अधिकारों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो जाए, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का आईना बन जाती है। जनपद में दिव्यांगजनों के आवास अधिकारों को लेकर उठी पीड़ा अब आंदोलन का स्वर लेने लगी है।

राष्ट्रीय दिव्यांग पुनर्वास एवं कल्याण प्रशिक्षण संस्था उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित दिव्यांगजनों की एक महत्वपूर्ण गोष्ठी में वर्षों से लंबित आवास योजनाओं का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। बैठक में विभिन्न विकास खंडों से आए दिव्यांगजन पदाधिकारियों और सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से अब तक अनेक पात्र दिव्यांगजन आवास योजना की सुविधा से वंचित हैं, जबकि उनके आवेदन वर्षों पूर्व जमा किए जा चुके हैं। दिव्यांगजनों का कहना है कि उन्होंने सितंबर और अक्टूबर 2024 में बड़ी संख्या में आवेदन जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत किए थे। इसके बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि ग्राम स्तर पर विभिन्न औपचारिकताओं और अनावश्यक मांगों के कारण पात्र लोग भी योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं। गोष्ठी में उस समय नाराजगी और बढ़ गई जब यह मुद्दा सामने आया कि 6 मई 2026 को लगभग 150 दिव्यांग आवेदकों को एक साथ अपात्र घोषित कर दिया गया। दिव्यांगजनों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पुनः जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि पात्रता की सही समीक्षा की जाए तो अधिकांश लाभार्थी योजना के हकदार साबित होंगे। बैठक में मौजूद संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि दिव्यांगजन समाज का वह वर्ग है, जिसे दया नहीं बल्कि उसका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारों की लड़ाई न्याय और मानवीय गरिमा से जुड़ा विषय है तथा प्रशासन को इस दिशा में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

संस्था की अध्यक्ष मंजुला श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न विकास खंडों से दिव्यांगजनों के शपथ पत्र और आपत्तियां भी प्राप्त की जा रही हैं, जिन्हें जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि सभी मामलों की पुनः जांच कर पात्र दिव्यांगजनों को शीघ्र आवास उपलब्ध कराया जाए तथा यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो व्यापक जनजागरण अभियान और लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा। दिव्यांगजनों ने एक स्वर में कहा कि उनका संघर्ष किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि सम्मान, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए है। दिव्यांगों का सवाल आज भी हवा में तैर रहा है आखिर कब तक पात्र लोग योजनाओं की फाइलों में कैद रहेंगे और कब उनके सिर पर अपने घर की छत का सपना साकार होगा? प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों की उम्मीदें टिकी हैं।

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