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सोमवार, 15 जून 2026

निकायों की ताकत बढ़ाने को राजधानी लखनऊ में जुटे जनप्रतिनिधि, 14 सूत्रीय मांगों से रखी विकास की नई तस्वीर

🔘 निकायों की ताकत बढ़ाने को लखनऊ में जुटे जनप्रतिनिधि, 

🔘 14 सूत्रीय मांगों से सरकार के सामने रखी विकास की नई तस्वीर

लखनऊ। लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव माने जाने वाले स्थानीय निकायों को और अधिक सशक्त बनाने के संकल्प के साथ सोमवार को राजधानी लखनऊ के होटल सिल्वट पैलेस में स्थानीय निकाय अध्यक्ष परिषद, उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। प्रदेश के विभिन्न नगर पालिका एवं नगर पंचायतों से आए सैकड़ों जनप्रतिनिधियों ने एक मंच पर एकत्र होकर जनहित, शहरी विकास और स्थानीय स्वशासन को नई शक्ति देने का संकल्प दोहराया।

बैठक की अध्यक्षता परिषद की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर परिषद के संरक्षक एवं नगर पालिका परिषद संडीला के अध्यक्ष मोहम्मद रईस अंसारी, उपाध्यक्ष धर्मवीर अग्रवाल एवं नेहा अवस्थी, महासचिव श्याम सुन्दर केसरी, संगठन मंत्री मो. आबिद अली, सचिव प्रेमलता राठौर, जितेन्द्र कुमार गुप्ता, राजकुमार मौर्य तथा विजय कुमार शुक्ला ‘रिंकू’ सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष अली मोहम्मद, नगर पालिका परिषद मोहम्मदी के अध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा, मैलानी नगर पंचायत अध्यक्ष कीर्ति महेश्वरी, धौरहरा से नफीस खां, सिंगाही से कय्यूम, ओयल नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा देवी, रुपईडीहा नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. उमाशंकर वैश्य, हरदोई नगर पालिका अध्यक्ष सुखसागर मिश्र, पाली नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद रिजवान तथा बहराइच नगर पालिका अध्यक्ष श्याम करन टीकरवाल समेत प्रदेशभर के निकाय प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक के दौरान परिषद ने प्रदेश सरकार के समक्ष 14 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए निकायों को अधिक अधिकार, संसाधन और सम्मान देने की आवश्यकता पर बल दिया। परिषद ने शिष्टाचार निधि में वृद्धि, अध्यक्षों के लिए मानदेय, सुरक्षा हेतु निःशुल्क गनर, राज्य वित्त में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की समाप्ति तथा सचिवालय में स्थायी प्रवेश पास जैसी महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। इसके साथ ही प्रत्येक निकाय में अधिशासी अधिकारी एवं जूनियर इंजीनियर की स्थायी नियुक्ति, रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, निकाय अध्यक्षों के लिए प्रोटोकॉल व्यवस्था लागू करने तथा विभागीय स्तर पर चार पहिया वाहन उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

 परिषद ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने हेतु प्रत्येक निकाय में एक उपनिरीक्षक और दो आरक्षियों की नियमित तैनाती तथा राज्य अतिथिगृहों एवं डाक बंगलों में निकाय अध्यक्षों को प्राथमिकता के आधार पर आवास सुविधा देने की मांग भी की। वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय निकाय केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और विकास की धड़कन हैं। यदि इनके निर्वाचित प्रतिनिधियों को पर्याप्त अधिकार, संसाधन और सम्मान प्राप्त होगा, तो शहरी विकास की गति कई गुना बढ़ेगी और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। बैठक के अंत में परिषद के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार से मांगों पर सकारात्मक विचार कर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। जनप्रतिनिधियों का यह सामूहिक स्वर केवल सुविधाओं की मांग नहीं, बल्कि मजबूत स्थानीय स्वशासन और जनकल्याण के नए अध्याय की पुकार के रूप में देखा जा रहा है।

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