गुड़ मॉर्निंग सर भारत की गुनगुनाती सुबह में आपका हार्दिक स्वागत है। वैसे तो आप बहुत ही बिजी रहते हैं किंतु भारत सरकार के 30 दिन के कोरेन्टीन ने आपको कुछ फुर्सत के पल दे दिए होंगे। हमने सोंचा क्यों न आपके इन पलो का हम पत्रकार कुछ फायदा उठा लें। वैसे तो हम पत्रकारों का फायदा उठाना फितरत है। हम पत्रकार है जनाब हम तो बहती हुई हवा का इंटरव्यू ले लें, पर कमबख्त हिंदुस्तान में आजकल हवाएं नही बवंडर चलते हैं। चलिए छोड़िये ये हिंदुस्तान है।
आप यह बताइए आपके बाड़े से एक बकरा कबड्डी खेलकर वापस कैसे लौट आता है?
अजी आपकी यह कुटिल मुस्कान बता रही है कि हिंदुस्तान की आबोहवा आपको आते ही लग गयी। आप भी अपनी मुस्कुराहट में अपनी नाकामी को छिपाने का हुनर सीख गए।
या आपकी डाइट में दिए जा रहे भोजन में घपला है।
कहीं आप भी भ्रष्टाचार के शिकार तो नही ?
हिंदुस्तान में अपने जन्मदिन पर पेड़ लगाने व कबूतर उड़ाने की प्रथा तो बहुत पुरानी है। आप हमारी इस नई परम्परा के अग्रदूत हैं। सचमुच भारत बदल रहा है। अब शांति कबूतर नही आप ही ला सकते हो।
चीता जी इससे पहले भी 2009 में गुजरात मे 2 जोड़ी चीते अये थे। दुर्भाग्य है कि अब वो हमारे बीच नही हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
चीता : दरअसल भारतीय नेताओं ने लुप्त होती चीता प्रजाति पर चिंतन करते हुए प्रयास किया था। लेकिन शायद हमारे उन अग्रजों ने भारत की बढ़ती आबादी पर चिंतन कर डाला, नतीजे में न तो वंश बढ़ाया और तनावग्रस्त अलग हो गए।
चीता जी आपकी जनसंख्या वृद्धि पर क्या राय है?
चीता : सबसे पहले तो मैं यह बता दूँ कि इस मामले पर तो मैं इस देशवासियों को अपना आदर्श मानकर आया हूँ। देश में धड़ाधड़ बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए प्रजनन तकनीकि को आत्मसात करूँगा। और जल्दी ही अपना कुनबा हरा भरा कर दूंगा। तब तक नही रुकूंगा जब तक जंगल प्रशासन को जनसँख्या नियंत्रण पर जागृति न करनी पड़े।
चीता जी आप अपने तेवरों को देखते हुए कूनो नेशनल पार्क को पर्याप्त मान रहे हैं ?
फिलहाल तो 3200 वर्ग किलोमिटर में फैले इस उद्यान में लग्भग 750 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में हम लोग ही रहेंगे, जलवायु भी अनुकूल है। लेकिन हम जल्द ही परिवार विस्तार की तरक्की करेंगे कि यह इलाका छोटा पड़ जाय।
चीता मित्रो से क्या कहना चाहेंगे आप ?
यही की चीता मित्र सरकार के निर्देशों का पालन करें। हमे पूरी ईमानदारी से हाई प्रोटीन डाइट दें, हमारा विशेष ख्याल रखें।
देशवासियों के नाम कोई सन्देश :
सबसे पहले प्रधानमंत्री को हार्दिक धन्यवाद देना चाहेंगे हम लोग, जो उन्होंने देश के पर्यावरण संरक्षण हेतु हम लोगो को बुलाया और हमें इतना प्यार व सुविधाएं मुहैया करवाई। उसके बाद देशवासियों से इतना कहना चाहूंगा विलुप्त हमारी प्रजाति हुई है आपकी नही, इसलिए ध्यान रहे प्रजनन दर हमे बढ़ानी है आपको नही। हम आपका अनुसरण करेंगे, आप हमारे इस अनुसरण का अनुकरण कतई न करें।
चीता को हार्दिक शुभकामनाएं, ऐच्छिक नहाय - पूतों फलें
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