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गुरुवार, 5 नवंबर 2026

Lmp. ऐतिहासिक दशहरा मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की त्रयोदशी पर बही काव्य की रसधार

🔘 ऐतिहासिक दशहरा मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की त्रयोदशी पर बही काव्य की रसधार, देशभर के दिग्गज कवियों ने बांधा समा

लखीमपुर। ऐतिहासिक दशहरा मेला केवल आस्था, परंपरा और मनोरंजन का उत्सव नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक चेतना का भी एक जीवंत मंच है। इसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा की त्रयोदशी पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शब्दों ने संवेदनाओं को स्वर दिया, गीतों ने दिलों को छुआ और हास्य-व्यंग्य की फुहारों ने श्रोताओं को देर रात तक गुदगुदाया। देश के ख्यातिलब्ध कवियों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने ऐसी काव्य महफिल सजाई कि पूरा पांडाल साहित्यिक उल्लास और तालियों की गूंज से सराबोर हो उठा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा 'टेनी' तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी योगानंद पांडेय उपस्थित रहे। अधिशासी अधिकारी संजय कुमार ने अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त 'अमर' ने किया।

 इस अवसर पर साहित्य, समाजसेवा और रचनात्मक योगदान के लिए कवि सुरेश सौरभ, डॉ. स्वाति पांडेय, समाजसेवी कीर्ति गुप्ता सहित अनेक साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को नगर पालिका परिषद की ओर से विशेष सम्मान से विभूषित किया गया। 

सम्मान समारोह ने साहित्य साधना और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण को नई प्रेरणा प्रदान की। तदोपरांत हास्य कवि डॉ. सर्वेश अस्थाना के संयोजन में सजी अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की महफिल में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का ऐसा जादू बिखेरा कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। 
प्रसिद्ध गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना, प्रताप फौजदार, डॉ. प्रवीण शुक्ला, डॉ. कीर्ति काले, डॉ. सोनरूपा विशाल, गजेंद्र प्रियांशु, अजय अंजाम, सौरभकांत शर्मा, सुनील ब्यास, महेश श्रीवास्तव, विकास बौखल और अभय सिंह निर्भीक ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से काव्य संध्या को यादगार बना दिया। कहीं हास्य-व्यंग्य के तीखे तीर चले तो कहीं ओजस्वी रचनाओं ने जोश और राष्ट्रप्रेम का संचार किया। कहीं शृंगार रस की कोमल अनुभूतियों ने मन के तार झंकृत किए तो कहीं गीतों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। 

हर कविता, हर गीत और हर व्यंग्य पर पांडाल तालियों से गूंज उठता। देर रात तक श्रोता कवियों की रचनाओं के साथ भावनाओं के अनूठे संसार में विचरण करते रहे। इस यादगार साहित्यिक आयोजन का एक विशेष आकर्षण विश्व रिकॉर्डधारी साहित्यकार राममोहन गुप्त 'अमर' के काव्य संग्रह 'अपेक्षा से उपेक्षा तक' का भव्य विमोचन रहा। 

राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित कवियों ने सामूहिक रूप से कृति का विमोचन कर रचनाकार की साहित्यिक साधना को सम्मानित किया। यह काव्य संग्रह जीवन के विविध अनुभवों, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक परिस्थितियों और अपेक्षाओं से उपजी अनुभूतियों को शब्दों में पिरोने का सशक्त प्रयास है। कृति के विमोचन ने कवि सम्मेलन की गरिमा में एक और साहित्यिक अध्याय जोड़ दिया। रचनाकार राममोहन गुप्त 'अमर' ने इस आत्मीय सम्मान और आयोजन की सफलता पर सभी अतिथियों, कवियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

 कार्यक्रम में मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेला अधिकारी समरा सईद, नीलम रस्तोगी, शमीम बानो, बजरंग शर्मा, कौशल तिवारी, रमेश चंद्र मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की सक्रिय उपस्थिति रही। कुलमिलाकर ऐतिहासिक दशहरा मेले की यह त्रयोदशी केवल एक सांस्कृतिक संध्या नहीं रही, बल्कि साहित्यिक विरासत, कवि प्रतिभा और सामाजिक संवेदनाओं का ऐसा संगम बनी, जिसने यह संदेश दिया कि उत्सवों की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनमें मनोरंजन के साथ साहित्य, संस्कृति और विचारों की रोशनी भी जगमगाती रहे।

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