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मंगलवार, 3 नवंबर 2026

लखीमपुर मेले में भोजपुरी सुरों से गुलजार हुई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एकादशी

🔘 लखीमपुर मेले में भोजपुरी सुरों से गुलजार हुई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एकादशी

🔘 18 विशिष्ट व्यक्तित्वों को नगर पालिका ने किया सम्मानित

लखीमपुर। ऐतिहासिक दशहरा मेला लखीमपुर की सांस्कृतिक विरासत में एक और यादगार अध्याय जुड़ गया, जब सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एकादशी भोजपुरी लोकसंस्कृति के नाम रही। भोजपुरी गीतों की मिठास, लोकधुनों की जीवंतता और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा मेला परिसर देर रात तक सुर, संगीत और उल्लास की तरंगों में झूमता रहा। हजारों दर्शकों की करतल ध्वनि और उत्साह ने इस सांस्कृतिक संध्या को अविस्मरणीय बना दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला के ग्यारहवें दिन आयोजित इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में भाजपा जिला महामंत्री राजेश कुमार सिंह, पिछड़ा मोर्चा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र मोदी, अनुसूचित मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रमोद चौधरी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रीतम सिंह बग्गा की गरिमामयी उपस्थिति रही। 

नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, अधिशाषी अधिकारी संजय कुमार एवं अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। 

उद्घाटन सत्र का प्रभावशाली संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त 'अमर' ने किया। 

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों, सामाजिक सक्रियता एवं संगठनात्मक योगदान के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा 18 विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उनकी सेवाओं का अभिनंदन किया गया। सम्मानित होने वालों में भाजपा नगर अध्यक्ष देवदत्त चड्ढा, उपाध्यक्ष अमित श्रीवास्तव 'जुग्गी', नीरज सिंह, अजय टंडन, संजय तिवारी, रवि श्रीवास्तव, मनोज मिश्रा, बृजेश मिश्रा, एडवोकेट मुनेंद्र त्रिपाठी, शुभम मिश्रा, बबलू गुप्ता, अंशुमान श्रीवास्तव, शौर्य सक्सेना, पूरन सिंह, धर्मवीर मौर्य, शर्मा प्रजापति, राजेश प्रजापति एवं गौरव सेठ शामिल रहे। सम्मान पाकर सभी के चेहरों पर प्रसन्नता और गौरव का भाव दिखाई दिया। यह सम्मान समारोह उन लोगों के योगदान को सार्वजनिक मंच पर पहचान देने का प्रेरक प्रयास बना, जो अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर समाज को सकारात्मक दिशा देने में जुटे हैं।

 इसके उपरांत भोजपुरी संस्कृति पर आधारित सुरमधुर सांस्कृतिक संध्या का आगाज हुआ। भोजपुरी लोकगायक दीपक सिंह, सुरेश कुशवाहा एवं जयाजी पार्टी ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। एक के बाद एक लोकप्रिय भोजपुरी गीतों और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक अपनी जगहों पर थिरकने को मजबूर हो गए। लोकसंगीत की माटी से जुड़ी धुनों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि भोजपुरी भाषा, परंपरा और लोकसंस्कृति की समृद्ध विरासत से भी लोगों को रूबरू कराया। कार्यक्रम में महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही। मेला परिसर दर्शकों से खचाखच भरा रहा और हर शानदार प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट कलाकारों का उत्साह बढ़ाती रही। देर रात तक चले इस आयोजन में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण बना कि लोकसंस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ा संगीत आज भी लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। विशाल जनसमूह की मौजूदगी के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन एवं नगर पालिका प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी से मोर्चा संभाले रखा।

 आयोजन की सफलता में संयोजक मंडल के विक्रम गुप्ता, अजय गुप्ता 'लकी', बृजेश पाल, अनिरुद्ध त्रिपाठी एवं राकेश कुमार की सक्रिय भूमिका रही। इस अवसर पर मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेला अधिकारी समरा सईद, नीलम रस्तोगी, शमीम बानो एवं इंजीनियर दुर्गेश वर्मा, रमेश चंद्र मिश्रा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

 भोजपुरी सुरों से सजी यह एकादशी केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि लोकभाषा, लोककला और सांस्कृतिक एकता का उत्सव बनकर उभरी। ऐतिहासिक दशहरा मेले ने एक बार फिर साबित किया कि जब मंच पर संस्कृति की खुशबू बिखरती है तो भाषा और क्षेत्र की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं और संगीत हर दिल को एक सूत्र में पिरो देता है।

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