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सोमवार, 31 अगस्त 2026

प्रश्न बने राष्ट्रबोध की दस्तक : लखीमपुर में ‘भारत को जानो’ प्रतियोगी परीक्षा का शुचिता भरा अवलोकन

🔘  प्रश्न बने राष्ट्रबोध की दस्तक :  लखीमपुर में ‘भारत को जानो’ परीक्षा का शुचिता भरा अवलोकन


🔘 भारत विकास परिषद् की ‘अखिल भारतीय भारत को जानो लिखित परीक्षा’ ने पहली बार लिया राष्ट्रीय स्वरूप, लखीमपुर-खीरी के दर्जनों विद्यालयों में भी गूंजा ज्ञान और संस्कार का राष्ट्रव्यापी अभियान

लखीमपुर-खीरी। कुछ तारीखें कैलेंडर के पन्नों पर आती हैं और गुजर जाती हैं, लेकिन कुछ तारीखें समय की देहरी पर इतिहास लिख जाती हैं। 31 अगस्त 2026 भारत विकास परिषद् के इतिहास में ऐसी ही एक तारीख बनकर दर्ज हो गई, जब वर्षों से शाखा स्तर पर आयोजित होती चली आ रही ‘भारत को जानो’ परीक्षा ने पहली बार अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण करते हुए ‘अखिल भारतीय भारत को जानो लिखित परीक्षा’ के रूप में देशभर में एक साथ अपनी नई राष्ट्रीय यात्रा का श्रीगणेश किया।

भारत विकास परिषद् के केंद्रीय नेतृत्व की दूरदर्शी और अभिनव पहल ने ज्ञान की इस धारा को शाखाओं की सीमाओं से निकालकर राष्ट्रव्यापी अभियान का रूप दे दिया। देशभर में लगभग 90 प्रतिशत परीक्षाएँ एक ही दिन संपन्न हुईं, जबकि 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता ने इसे देश की नई पीढ़ी को इतिहास, संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रबोध से जोड़ने वाला विराट शैक्षिक अभियान बना दिया। लगभग 70 प्रतिशत परीक्षाएँ OMR शीट के माध्यम से आयोजित की गईं। देश के हजारों विद्यालयों में भारत विकास परिषद् के समर्पित कार्यकर्ताओं ने अनुशासन, निष्ठा और परीक्षा की शुचिता एवं गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस महाअभियान को सफल बनाया।

 एक स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से परीक्षा की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित स्वरूप दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप विशाल राष्ट्रव्यापी आयोजन सफलतापूर्वक मूर्त रूप ले सका। लेकिन ‘भारत को जानो’ केवल प्रश्नों के उत्तर लिखने वाली परीक्षा नहीं है। यह उन सवालों की यात्रा है, जो बच्चों के मन में अपने देश को लेकर जिज्ञासा जगाते हैं। यह उस स्मृति को जीवित रखने का प्रयास है, जिसमें भारत का इतिहास, संस्कृति, सभ्यता, परंपराएँ, महापुरुष, गौरवशाली उपलब्धियाँ और भारतीय जीवन-मूल्य सांस लेते हैं। क्योंकि जिस पीढ़ी को अपनी जड़ों का ज्ञान होता है, वही अपने भविष्य की दिशा आत्मविश्वास के साथ तय कर सकती है। इसीलिए ‘भारत को जानो’ की यह नई राष्ट्रीय यात्रा महज एक परीक्षा नहीं, बल्कि ज्ञान से संस्कार, संस्कार से चरित्र और चरित्र से राष्ट्रनिर्माण की ओर बढ़ता कदम है।

 इसी क्रम में जनपद लखीमपुर-खीरी के विभिन्न दर्जनों विद्यालयों में भी ‘भारत को जानो’ प्रतियोगिता का आयोजन एक साथ किया गया। विद्यालयों में विद्यार्थियों ने उत्साह, अनुशासन और गंभीरता के साथ परीक्षा में सहभागिता की। परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत विकास परिषद् के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता लगातार सक्रिय रहे। भारत विकास परिषद् के क्षेत्रीय संयोजक जनसंपर्क, अवध एवं नैमिष प्रांत, राजवीर सिंह ने भ्रमणशील रहकर विभिन्न परीक्षा केंद्रों का अवलोकन किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। 

उन्होंने परीक्षा संचालन में लगे कार्यकर्ताओं, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। इस भ्रमण एवं अवलोकन कार्यक्रम में सुरेन्द्र कुमार तोलानी, डॉ. रूपक टंडन, एच एस पहवा, अमित सिंह चौहान, शैलेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। राजवीर सिंह ने इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय पहल के लिए भारत विकास परिषद् के केंद्रीय नेतृत्व, सभी प्रांतों, शाखाओं, विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा अभियान को सफल बनाने वाले हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं साधुवाद दिया।

 उन्होंने कहा कि 31 अगस्त केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक संकल्प का शुभारंभ है। ऐसा संकल्प, जिसमें प्रश्न-पत्र का प्रत्येक प्रश्न नई पीढ़ी को अपने देश के थोड़ा और करीब ले जाता है उसे अपने अतीत से परिचित कराता है, वर्तमान का बोध कराता है और भविष्य के प्रति जिम्मेदार बनाता है। आज जब देश के लाखों बच्चे एक साथ भारत को जानने के लिए प्रश्नों से जूझ रहे थे, तब दरअसल वे अपने भीतर एक और बड़ा प्रश्न खोज रहे थे ‘मैं अपने भारत को कितना जानता हूं?’ और शायद इसी प्रश्न से उस उत्तर की शुरुआत होती है, जिसकी मंजिल है भारत को जानना… भारत को समझना… भारत पर गर्व करना… और भारत के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना।

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