⚫ मूक पीड़ा की पुकार सुन दौड़ पड़े गौसेवक, करुणा के स्पर्श से फिर खड़ा हुआ घायल बछड़ा
लखीमपुर खीरी। संवेदनाओं से ही समाज की वास्तविक पहचान बनती है। जब किसी असहाय जीव की मौन वेदना किसी संवेदनशील हृदय तक पहुँचती है और उसकी रक्षा के लिए लोग बिना किसी स्वार्थ के आगे आते हैं, तब मानवता अपने सबसे सुंदर स्वरूप में दिखाई देती है। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायी दृश्य बुधवार प्रातः लखीमपुर खीरी के बरखेरवा मोहल्ले में देखने को मिला, जहाँ करुणा और सेवा के समर्पित प्रयासों ने एक घायल बछड़े को नया जीवन देने का कार्य किया।
प्रातःकाल सेवानिवृत्त इलाहाबाद बैंक के प्रबंधक कुलदीप सिंह चीमा ने देखा कि एक गाय का बछड़ा गंभीर रूप से चोटिल होकर उठने में असमर्थ है। मूक प्राणी की पीड़ा को अनदेखा करने के बजाय उन्होंने तत्काल एनीमल लवर्स सोसायटी, लखीमपुर खीरी के संरक्षक सुरेन्द्र कुमार तोलानी एवं महामंत्री प्रशांत लाला को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही संस्था ने बिना किसी विलंब के सक्रियता दिखाई। गौसेवक गोलू जोशी तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे और घायल बछड़े का उपचार प्रारंभ किया।
उन्होंने पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ प्राथमिक उपचार किया। कुछ ही समय में उपचार का सकारात्मक परिणाम सामने आया और जो बछड़ा कुछ देर पहले दर्द से तड़प रहा था, वह धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़ा हो गया। यह दृश्य देखकर वहाँ उपस्थित लोगों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता झलक उठी। मानो सेवा और करुणा ने पीड़ा पर विजय प्राप्त कर ली हो। स्थानीय नागरिकों ने एनीमल लवर्स सोसायटी की तत्परता, सेवा भावना और मानवीय संवेदनशीलता की मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों का कहना था कि आज के दौर में जब कई बार लोग मूक प्राणियों की पीड़ा को अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं, ऐसे समय में संस्था के कार्य समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि एनीमल लवर्स सोसायटी, लखीमपुर खीरी लंबे समय से घायल, बीमार और असहाय पशुओं के उपचार, संरक्षण और सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल पशुओं को उपचार उपलब्ध कराना, जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुँचाना तथा आमजन को पशुओं के प्रति संवेदनशील बनाने जैसे अनेक सेवा कार्य संस्था द्वारा नियमित रूप से किए जा रहे हैं। यह घटना केवल एक घायल बछड़े के उपचार की नहीं, बल्कि उस जीवंत मानवीय चेतना की कहानी है जो यह संदेश देती है कि दया, करुणा और सेवा ही मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म हैं।
यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति मूक प्राणियों के प्रति ऐसी ही संवेदनशीलता अपनाए, तो न केवल असंख्य बेजुबान जीवन सुरक्षित होंगे, बल्कि हमारी मानवीय संस्कृति और भी समृद्ध एवं गौरवशाली बनेगी। एनीमल लवर्स सोसायटी का यह सेवा कार्य वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा, संवेदना और मानवता का जीवंत उदाहरण है।
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