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बुधवार, 15 जुलाई 2026

Lmp. प्रबुद्धजनों के सुझावों को मिला सम्मान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने समाधान का दिलाया भरोसा

🔘 प्रबुद्धजनों के सुझावों को मिला सम्मान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने समाधान का दिलाया भरोसा

लखीमपुर खीरी। लोकतंत्र तभी सशक्त होता है, जब सरकार और समाज के बीच संवाद का सेतु निरंतर मजबूत होता रहे। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए शिव शक्ति मैरिज लॉन में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम' में प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी तथा क्षेत्रीय महामंत्री नीरज वर्मा ने जिले के प्रबुद्धजनों से सीधा संवाद स्थापित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने की।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर अपने विचार रखे। राममोहन गुप्त, धर्मेंद्र शुक्ल, धर्मचंद्र जैन एवं सरदार अमरजीत अजमानी ने सरकार की योजनाओं से आमजन को मिल रहे लाभों का उल्लेख करते हुए क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली कुछ व्यावहारिक समस्याओं और कमियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

 प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न विकासोन्मुखी और जनहितकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि संवाद के माध्यम से प्राप्त प्रत्येक सुझाव और समस्या पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए उनके प्रभावी निस्तारण का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जनभागीदारी और रचनात्मक सुझावों को विकास की सबसे बड़ी शक्ति मानती है।

कार्यक्रम का संयोजन आशीष गुप्ता (जिला संयोजक, व्यवसायिक प्रकोष्ठ भाजपा) ने किया। आयोजन को सफल बनाने में रामजी मौर्य (जिला उपाध्यक्ष), शौर्य सक्सेना (जिला आईटी प्रमुख), राहुल मिश्रा, उमाशंकर मिश्रा (दद्दू) एवं उमेश शुक्ला का विशेष योगदान रहा।

इस अवसर पर शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें डॉ. आर.सी. पांडेय, डॉ. अखिलेश खरे, डॉ. आर.के. गुप्ता, डॉ. डी एन मालपानी, अधिवक्ता विपुल सेठ, अधिवक्ता विजय प्रताप सिंह, गोपाल अग्रवाल, दीपक पुरी सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, अधिवक्ता, शिक्षाविद, उद्योगपति, व्यापारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। 

प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब शासन और समाज आमने-सामने बैठकर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, तब विकास केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जनविश्वास और जनसहभागिता के साथ नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। संवाद, सुझाव और समाधान की यही संस्कृति लोकतंत्र को अधिक सशक्त, संवेदनशील और जनोन्मुखी बनाती है।

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