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बुधवार, 15 जुलाई 2026

18वें दिन भी अडिग अनशन : क्या दिल्ली के जंतर-मंतर पर जिंदगी और लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा चल रही है?

⚫ 18वें दिन भी अडिग अनशन : क्या दिल्ली के जंतर-मंतर पर जिंदगी और लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा चल रही है?

नई दिल्ली। जंतर-मंतर की तपती ज़मीन पर बिछा एक सफेद गद्दा आज केवल एक व्यक्ति के अनशन का प्रतीक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक असहमति, जनआंदोलन और मानवीय संवेदनाओं की कठिन परीक्षा का केंद्र बन गया है। शिक्षाविद सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 18वां दिन है। हर बीतते दिन के साथ उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है और इसे लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

इसी बीच मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने अदालत में जनहित याचिका दाखिल कर मांग की है कि सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराकर आवश्यक चिकित्सा और भोजन उपलब्ध कराया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम घट चुका है, रक्तचाप 107/70 एमएमएचजी तथा ब्लड शुगर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया है। याचिका में चेतावनी दी गई है कि समय रहते उपचार नहीं मिला तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। जंतर-मंतर का दृश्य भी बेहद मार्मिक है। वांगचुक सफेद गद्दे पर लेटे हुए हैं, चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। बताया जा रहा है कि कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि बैठने या खड़े होने पर उन्हें चक्कर आने लगते हैं और सामान्य गतिविधियां भी कठिन हो गई हैं। प्रदर्शन के समर्थन में जुड़े लोगों ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। यह आंदोलन नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद शुरू हुए व्यापक विरोध से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक पदयात्रा निकालने की भी घोषणा की है। अब पूरा ध्यान अदालत की सुनवाई और सरकार की अगली रणनीति पर है। यह मामला केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार, जनआवाज, सरकारी जवाबदेही और मानव जीवन की सुरक्षा जैसे गंभीर प्रश्नों के केंद्र में आ खड़ा हुआ है। आने वाले दिन तय करेंगे कि समाधान संवाद से निकलेगा या यह आंदोलन देश की राजनीति और जनचेतना में एक नया अध्याय लिखेगा।

नोट : यह समाचार उपलब्ध दावों और सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी पर आधारित है। अदालत में दायर याचिका के आरोपों और चिकित्सा संबंधी दावों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा न्यायालय का अंतिम निर्णय आना शेष है।

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