🔘 स्वावलंबन, बचत और संगठन की त्रिवेणी से सशक्त समाज निर्माण का संकल्प
🔘 वैभव श्री समूह कार्यशाला में जागी आत्मनिर्भरता की नई चेतना
🔘 दीप प्रज्वलन, देशभक्ति गीत और प्रेरक विचारों के साथ हुआ शुभारंभ, प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों में स्वावलंबन, बचत एवं समूह संचालन के सूत्रों का हुआ विस्तृत प्रशिक्षण
लखीमपुर खीरी। "धीरे-धीरे देश हमारा आगे बढ़ता जाता है..." देशभक्ति से ओतप्रोत इस प्रेरणादायी गीत की स्वर लहरियों, दीप प्रज्वलन तथा महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ सेवा भारती सीतापुर विभाग द्वारा आयोजित "वैभव श्री समूह कार्यशाला" का शुभारंभ स्थानीय सौभाग्य पैलेस में अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यशाला का आयोजन सेवा भारती लखीमपुर खीरी के आतिथ्य में संपन्न हुआ, जिसमें समाज जीवन के विविध क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं प्रशिक्षणार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में आईटीआई निघासन के प्रधानाचार्य विनोद कुमार ने अध्यक्षता की। मंच पर राष्ट्रीय सेवा भारती वैभव श्री के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुख्य प्रशिक्षक विनोद मोहने, सेवा भारती सीतापुर विभाग अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल तथा सेवा भारती अवध प्रांत की महिला कार्य प्रमुख डॉ. अंशु वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
🔘 प्रथम सत्र : स्वावलंबन बना आत्मविश्वास और विकास का मूलमंत्र
कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ. डी.एन. मालपानी ने "स्वावलंबन संकल्पना" विषय पर अत्यंत प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि स्वावलंबन केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का नाम नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का आधार है। उन्होंने उदाहरणों और व्यवहारिक अनुभवों के माध्यम से बताया कि जब व्यक्ति अपने श्रम, कौशल और संकल्प पर विश्वास करना सीख लेता है, तभी समाज और राष्ट्र की वास्तविक उन्नति संभव होती है। अध्यक्षीय उद्बोधन में विनोद कुमार ने सेवा भारती द्वारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सेवा और संस्कार पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आईटीआई द्वारा संचालित विभिन्न ट्रेड्स, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षणों की जानकारी देते हुए युवाओं और महिलाओं को कौशल आधारित आत्मनिर्भरता अपनाने का संदेश दिया।
🔘 द्वितीय सत्र : बचत का संस्कार बना समृद्ध जीवन का आधार
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में "बचत क्यों आवश्यक है?" विषय पर अत्यंत रोचक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस सत्र में मुख्य प्रशिक्षक विनोद मोहने ने केवल धन की बचत ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बचत का वास्तविक अर्थ केवल पैसा जमा करना नहीं, बल्कि समय, श्रम, जल, पर्यावरण, पारिवारिक संबंधों, ऊर्जा और सामाजिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को समूह चर्चा और गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय रूप से जोड़ा गया। सभी ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए जीवन में बचत की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता राम मोहन गुप्त ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सरिता जैन उपस्थित रहीं। अध्यक्षीय संबोधन में राम मोहन गुप्त ने कहा कि बचत केवल भविष्य की सुरक्षा नहीं, बल्कि समाज में सहयोग, संवेदना और सेवा की संस्कृति को सुदृढ़ करने का माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सजगता और संतुलन के साथ संसाधनों का उपयोग करने तथा आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया।
🔘 तृतीय एवं चतुर्थ सत्र : समूह गठन और संचालन की व्यवहारिक शिक्षा ने बढ़ाया आत्मविश्वास
कार्यशाला के तृतीय एवं चतुर्थ सत्र पूर्णतः व्यवहारिक प्रशिक्षण पर केंद्रित रहे। इन सत्रों में वैभव श्री समूह गठन एवं संचालन विषय पर विस्तृत प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
गोपाल अग्रवाल की अध्यक्षता तथा शिवाली गंगवार की विशिष्ट उपस्थिति में मुख्य प्रशिक्षक विनोद मोहने ने प्रतिभागियों को समूह निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने समूह संचालन की कार्यपद्धति, नियमित बैठकों की व्यवस्था, खातों का संधारण, आय के स्रोतों की पहचान, वित्तीय अनुशासन, आपसी समन्वय, नेतृत्व विकास तथा संगठनात्मक व्यवस्थाओं की बारीकियों को सरल और व्यावहारिक ढंग से समझाया। प्रशिक्षणार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों एवं अभ्यास सत्रों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इससे उन्हें समूह संचालन के व्यावहारिक पक्ष को समझने और उसे अपने क्षेत्र में लागू करने का आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। समाज सशक्तीकरण के संकल्प के साथ संपन्न हुई कार्यशाला। पूरे प्रशिक्षण वर्ग के दौरान सेवा, संस्कार, स्वावलंबन और संगठन की भावना का जीवंत वातावरण बना रहा। कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने इसे ज्ञान, प्रेरणा और व्यवहारिक प्रशिक्षण का अनूठा संगम बताया।
इस अवसर पर रजनीश कुमार, राम मोहन गुप्त, महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अंशु वर्मा, सुधांशु वर्मा, राहुल सिंह, गोपाल अग्रवाल, डॉ. डी.के. वर्मा, योगेश जोशी, मनीन्द्र मिश्रा, डॉ. डी.एन. मालपानी, डॉ. अनिल त्रिपाठी, आलोक शुक्ला, सीमा जैन, सरिता जैन, कुमकुम गुप्ता, मयूरी नागर, मधुलिका त्रिपाठी, शकुंतला गुप्ता, शालिनी गुप्ता, राजेश दीक्षित, अक्षत शुक्ला, शैलेश गुप्ता, उत्तम बंसवार, जीतेन्द्र अवस्थी, सोनाली बाल्मीकी, सुमन राय, विनीत, शिव, सूर्यांश, कृष्णा, धनवीर, हेमा, रामदुलारी देवी, माही गुप्ता, मुस्कान गुप्ता सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन उपरांत विभाग एवं जनपद स्तर के दायित्वधारियों की महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी योजनाओं, समाज सशक्तीकरण अभियानों तथा वैभव श्री समूहों के विस्तार को लेकर व्यापक चर्चा की गई। कुलमिलाकर "जब स्वावलंबन का संकल्प, बचत का संस्कार और संगठन की शक्ति एक साथ जुड़ते हैं, तब केवल व्यक्ति नहीं, पूरा समाज आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर अग्रसर होता है।"
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