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शुक्रवार, 29 मई 2026

Lmp. यूरिया संकट भीषण गर्मी में सुबह से लाइनों में लग रहे अन्नदाता कालाबाजारी के बीच जिम्मेदार बने अनजान

⚫ यूरिया संकट भीषण गर्मी में सुबह से लाइनों में लग रहे अन्नदाता कालाबाजारी के बीच जिम्मेदार बने अनजान


लखीमपुर खीरी। जनपद में यूरिया खाद का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में जिले का किसान सुबह से ही सहकारी समितियों और निजी दुकानों के बाहर लाइनों में लगने को मजबूर है। इसके बावजूद शाम तक किसानों को यूरिया की एक बोरी भी नसीब नहीं हो पा रही है। खाद न मिलने से किसानों को अपनी फसलों के बर्बाद होने का डर सता रहा है। इस व्यवस्था से परेशान किसान संगठन अब बड़े आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की रणनीति बना रहे हैं।एक तरफ जहां विभागीय अधिकारी जिले में खाद की कोई कमी न होने का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।सरकारी समितियों पर यूरिया नदारद है और जहां मिल भी रही है वहां ओवररेटिंग (तय दाम से अधिक वसूली) की चर्चाएं आम हैं। इसके विपरीत, निजी दुकानों पर यूरिया की बड़े पैमाने पर ऊंचे दामों पर कालाबाजारी हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि अधिकांश दुकानों पर न तो कोई स्टॉक बोर्ड लगाया गया है और न ही किसानों को स्टॉक की सही जानकारी दी जा रही है।अधिकारियों को 'कमीशन' देने के नाम पर लूट, खुलेआम खुली पोल,यूरिया संकट की हकीकत जानने जब मीडिया कर्मियों की एक टीम महेवागंज स्थित 'वर्मा इंटरप्राइजेज' पहुंची, तो वहां के संचालकों ने साफ कह दिया कि उनके पास यूरिया नहीं है। हालांकि, जब दुकान के स्टॉक बोर्ड पर नजर डाली गई तो उस पर 408 बोरी यूरिया दर्ज थी। जब दुकानदारों से बिक्री रजिस्टर दिखाने को कहा गया, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। संचालक ने मीडिया के सामने यह हैरान करने वाला दावा किया कि उन्हें विभागीय अधिकारियों को 'खर्चा-पानी' देना पड़ता है। अगर वे यूरिया को महंगे दामों पर नहीं बेचेंगे, तो अधिकारियों का खर्चा कहां से पूरा करेंगे।

एसी कमरों से बाहर कब निकलेंगे जिम्मेदार 

इस खुलेआम कालाबाजारी और भ्रष्टाचार के खेल से साफ है कि जिले में यूरिया की कमी नहीं है, बल्कि उसे जानबूझकर कृत्रिम संकट में बदला जा रहा है। किसान बूंद-बूंद पसीने में अपनी बारी का इंतजार कर रहा है और जिम्मेदार कृषि अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले पर जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी कब संज्ञान लेते हैं और भ्रष्ट दुकानदारों व लापरवाह अधिकारियों पर जमीनी कार्रवाई करते हैं।

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