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गुरुवार, 28 मई 2026

Digital news. त्रिभाषा नीति से निखरेगा विद्यार्थियों का भविष्य : डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह

🔘 त्रिभाषा नीति से निखरेगा विद्यार्थियों का भविष्य : डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह

लखीमपुर खीरी। शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और सभ्यता को पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इसी भाव को आत्मसात करते हुए पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (यू.पी. बोर्ड) के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने CBSE की नई त्रिभाषा नीति (R1-R2-R3) का हृदय से स्वागत करते हुए इसे नई शिक्षा नीति-2020 एवं NCFSE-2023 के विज़न के अनुरूप एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम बताया है।

उन्होंने कहा कि कक्षा 9 से तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किए जाने से विद्यार्थियों को मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा, हिंदी तथा वैश्विक भाषाओं के बीच संतुलित ज्ञान और अभिव्यक्ति विकसित करने का सशक्त अवसर प्राप्त होगा। यह नीति केवल भाषाई शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, विविधता और राष्ट्रीय एकता को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली पहल है। डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि बहुभाषिक शिक्षा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को अधिक व्यापक, संवेदनशील और आत्मविश्वासी बनाएगी। मातृभाषा से जुड़ाव जहां अपनी जड़ों से प्रेम सिखाएगा, वहीं अन्य भाषाओं का ज्ञान उन्हें वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी और सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक शक्ति है। नई त्रिभाषा नीति इस विविधता को सम्मान देते हुए विद्यार्थियों के भीतर संवाद, समन्वय और संस्कारों की नई चेतना विकसित करेगी। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और आधुनिकता के संतुलन के साथ एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करेगा।

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