🔘 अयोध्या के श्री धर्महरि चित्रगुप्त मंदिर के लिए लखीमपुर खीरी से निर्णायक पहल, डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन
लखीमपुर खीरी। आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण के लिए प्रदेश का कायस्थ समाज अब निर्णायक पहल की ओर बढ़ चला है। श्रीधाम अयोध्या में स्थित आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त के पावन स्थल श्री धर्महरि चित्रगुप्त मंदिर के जीर्णोद्धार एवं समग्र विकास की मांग को लेकर कल प्रदेशभर में एक संगठित स्वर गूंजेगा।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा उत्तर प्रदेश के आह्वान पर सभी जिलों में जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कल 2 अप्रैल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसी क्रम में लखीमपुर खीरी में भी अखिल भारतीय कायस्थ महासभा एवं श्री चित्रगुप्त कायस्थ सभा के संयुक्त तत्वावधान में जिला प्रशासन को कल गुरुवार को प्रातः 10 बजे ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा। ज्ञापन में भावनाओं की गूंज और तर्कों की दृढ़ता स्पष्ट रूप से झलकती है। इसमें उल्लेख किया गया है कि सृष्टि के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले न्याय के देवता भगवान श्री चित्रगुप्त के चार प्रमुख धामों में से एक, श्रीधाम अयोध्या स्थित धर्महरि चित्रगुप्त मंदिर, न केवल कायस्थ समाज की आस्था का केंद्र है बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर भगवान राम के दर्शन के साथ-साथ इस मंदिर में भी श्रद्धा अर्पित करते हैं। किंतु वर्तमान में इस प्राचीन मंदिर के समुचित विकास और सौंदर्यीकरण का अभाव श्रद्धालुओं की भावनाओं को कहीं न कहीं आहत करता है। ज्ञापन में कायस्थ समाज ने मांग की है कि मंदिर के सुनियोजित विकास, संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक सशक्त ट्रस्ट का गठन किया जाए, जिससे यह पवित्र स्थल श्रीधाम अयोध्या की भव्यता के अनुरूप विकसित हो सके और पर्यटन की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सके। इस पहल का नेतृत्व करते हुए प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष चित्रांश राजीव रतन खरे, जिलाध्यक्ष अनूप सिंह, जिला महामंत्री रमेश पांडिया एवं कोषाध्यक्ष लोकेंद्र श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से समाज की भावनाओं को मुखर करते हुए कहा कि यह केवल एक मंदिर के विकास का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारी आस्था, पहचान और सांस्कृतिक गौरव के संरक्षण का विषय है। उन्होंने क्षेत्रीय कायस्थ समाज से अपील की है 2 अप्रैल को सुबह 10 बजे खीरी कलेक्ट्रेट पहुंचकर इस ऐतिहासिक धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत के विकास संबंधी ज्ञापन में सहभागी बने। कुलमिलाकर कायस्थ समाज की यह संगठित आवाज अब शासन-प्रशासन के द्वार पर दस्तक देगी, देखना यह है कि यह आस्था का स्वर कब और कैसे विकास की वास्तविक तस्वीर में परिवर्तित होता है।
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