लखीमपुर खीरी। न्याय की चौखट पर वर्षों से दस्तक देती एक पीड़ित मासूम की करुण पुकार आखिरकार सुनी गई। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट प्रथम लखीमपुर खीरी की विद्वान न्यायाधीश श्रीमती नूरी अंसार ने बहुचर्चित मुकदमा अपराध संख्या 38 सन 2016 में अहम फैसला सुनाते हुए दरिंदगी के आरोपी शरीफ पुत्र नत्था निवासी ग्राम पढुवा, थाना निघासन को दोष सिद्ध पाया।
न्यायालय ने आरोपी को कठोर संदेश देते हुए 10 वर्ष के कारावास एवं ₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई, मानो यह फैसला समाज को यह बता रहा हो कि मासूमियत के खिलाफ उठने वाला हर हाथ अंततः कानून के शिकंजे में ही जकड़ा जाएगा। यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उस विश्वास की परीक्षा था जो समाज न्याय व्यवस्था पर करता है। अभियोजन पक्ष ने सशक्त पैरवी करते हुए वादी मुकदमा, पीड़िता, विवेचक संजीव वर्मा, प्रधानाचार्य अरविंद कुमार और लेखिका संगीता गौतम की गवाहियों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा। साथ ही 7 महत्वपूर्ण दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कर पूरे घटनाक्रम को प्रमाणित किया। विशेष लोक अभियोजक बृजेश कुमार पांडे की प्रभावी दलीलों ने अदालत को सच्चाई की गहराई तक पहुंचाया, जहां से न्याय की रोशनी फूटी और अपराधी को उसके कृत्य का दंड मिला। यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सख्त चेतावनी है “मासूमों के सम्मान पर आंच लाने वालों के लिए कानून अब और भी कठोर है, और न्याय देर से ही सही, लेकिन अटल है।”
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