🔘 चित्तौड़ साहित्य उत्सव का भव्य समापन बना शब्द, संवेदना और संस्कृति का अनुपम संगम
जनजागरण डेस्क। ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ की पावन धरा पर आयोजित चित्तौड़ साहित्य उत्सव–2026 का समापन शुक्रवार रात्रि को सांस्कृतिक संध्या और संस्थापक-प्रवर्तक अनिल सक्सेना द्वारा प्रस्तुत घोषणा-पत्र के ऐतिहासिक वाचन के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन साहित्य, संस्कृति, लोककला और युवा चेतना का विराट संगम बनकर उभरा, जिसने चित्तौड़गढ़ को वैचारिक और रचनात्मक ऊर्जा से भर दिया।
उत्सव के दौरान जिले के लगभग 6700 छात्र-छात्राओं, युवाओं एवं साहित्यप्रेमियों की सक्रिय सहभागिता ने इसे जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। देश के विभिन्न जिलों से पधारे 247 से अधिक साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ दीं। इस भव्य उत्सव की शोभा देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति से और भी बढ़ी। पद्मश्री डॉ. सी. पी. देवल (अजमेर), पद्मश्री डॉ. उर्मिला श्रीवास्तव (मिर्जापुर), पद्मश्री जानकी राम भांड (भीलवाड़ा), पद्मश्री मुन्ना मास्टर (बगरू) तथा पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल (राजसमंद) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
इस अवसर पर मोहमदी से पधारे डॉ. गोविन्द गुप्ता को विशिष्ट सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्होंने चार सत्रों को संबोधित करते हुए विविध विषयों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए तथा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में ‘वंदेमातरम्’ गीत के महत्व को भावपूर्ण ढंग से रेखांकित किया।। साथ ही मोहमदी से प्रशांत मिश्रा द्वारा किया गया काव्यपाठ भी श्रोताओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
राजस्थान सरकार के कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी बसंत सिंह के मार्गदर्शन में सात प्रमुख पुस्तक स्टॉल स्थापित किए गए, जिनमें राजस्थान साहित्य अकादमी, हिंदी ग्रंथ अकादमी, राजस्थान राज्य अभिलेखागार, राजस्थान प्राच्य प्रतिष्ठान, सूचना केंद्र चित्तौड़गढ़, कलमकार मंच तथा गौतम बुक एवं नवीन पांडेय द्वारा अकादमिक प्रकाशनों के स्टॉल प्रमुख रहे। इसके अतिरिक्त एक दर्जन से अधिक पुस्तक स्टॉल और आकर्षक कला दीर्घा यूथ मूवमेंट राजस्थान के तत्वावधान में स्थापित की गईं, जहाँ तीनों दिनों तक साहित्यप्रेमियों का निरंतर जमघट लगा रहा। भारतीय लोककला मंडल, उदयपुर द्वारा प्रस्तुत नाटक मंचन, कठपुतली शो एवं भवाई नृत्य ने लोकसंस्कृति की जीवंत छवि को साकार किया। लोकधुनों, रंगों और भावों से सजी इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जोड़ दिया। समग्र रूप से चित्तौड़ साहित्य उत्सव–2026 न केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का उत्सव बना, बल्कि उसने युवा पीढ़ी में सृजनशीलता, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का नवसंचार कर एक प्रेरणादायी संदेश भी दिया। यह आयोजन आने वाले समय में साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
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