जर्जर पुल को न ओके न कंडम बोल रहे जिम्मेदार, रजवारी के पास बेहद ज्वलनशील गैस से भरे टैंकर व सिलिंडर लदे ट्रक की भयानक भिड़ंत, 2 घायल
सिधौना क्षेत्र के राजवारी पुल के जर्जर होने के बाद सिर्फ जांच के नाम पर महीनों से बंद किए गए 2 लेन के चलते जहां आए दिन बचे हुए 2 लेन में वाहनों की आमने-सामने की गंभीर टक्कर हो रही है, वहीं बुधवार को फिर से एक बेहद गंभीर घटना हो गई। जहां बेहद खतरनाक व ज्वलनशील एलपीजी से भरे गैस टैंकर व गैस सिलिंडरों से भरे ट्रक की सीधी भिड़ंत हो गई। संयोग अच्छा था कि ट्रक में भरे सिलिंडर खाली थे, जिससे बहुत बड़ा हादसा टल गया। वहीं घटना में दोनों वाहनों के चालक घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। लेकिन वाहनों के बीच सड़क पर होने के चलते 2 घंटों तक राजमार्ग जाम रहा। जिससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बुधवार को कोलकाता से देवरिया जा रहा था। वहीं गाजीपुर से वाराणसी की तरफ एक ट्रक 30 खाली गैस सिलिंडर लादकर जा रहा था। बुधवार की शाम 4 बजे अभी वो रजवारी के पास पहुंचे थे कि तभी दोनों की सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों के केबिन आपस में घुसकर चिपक गए थे। वहीं अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। इधर बेहद ज्वलनशील गैस से भरे हुए टैंकर व सिलिंडर लदी ट्रक की टक्कर देख वहां हड़कंप मच गया और लोग किसी अनहोनी की संभावना से वाहनों को मोड़कर भागने लगे और काफी दूर जाकर खड़ी किया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक चालक संतोष यादव निवासी बेला पिंडरा को किसी तरह से केबिन से बाहर निकाला। वहीं टैंकर चालक लल्लन पाल पुत्र सूर्यबलि पाल निवासी कोईरौना, मझगांवा, संत रविदास नगर को भी काफी मशक्कत के बाद बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। इधर बीच सड़क पर टक्कर होने से करीब 2 घंटों तक आवागमन बाधित रहा और वाहनों का जाम लगा रहा। बाद में एनएचएआई व पुलिसकर्मियों ने किसी तरह से दोनों वाहनों को सड़क से हटवाया तो आवागमन बहाल हो सका। बता दें कि वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर गोमती नदी पर राजवारी में 2 पुल बने हैं। जिसमें एक पुल नया बना है और दूसरा पुल पुरानी सड़क के समय का ही है और करीब 6 दशक पुराना बताया जाता है। पुराने पुल पर 2 लेन व नए पुल पर 2 लेन संचालित हैं। इस बीच बीते माह पुराने पुल में दरार की शिकायत पर पुल के दोनों लेन से आवागमन बंद कर दिया गया और टोल प्लाजा के पास से सिधौना तक के मार्ग को वन वे कर आवागमन नए पुल से शुरू कर दिया गया। इस बीच देश की 3 आईआईटी कॉलेज टीमें आकर जांच कर चली गईं। इसके बाद तमाम अधिकारी आए और जांच कर चले गए लेकिन मजाल क्या कि किसी ने भी पुल को पूर्ण रूप से जर्जर या पुल की स्थिति ठीक होने की बात कह आवागमन बहाल करने या पूरी तरह से बंद कर नया पुल बनाने की घोषणा करने का रिस्क लिया हो। जिसके चलते तभी से पुल बंद चल रहा है। इस पुल से सिर्फ 2 पहिया या टेंपो आदि ही गुजरते हैं। ऐसे में नए पुल के वन वे होने से सभी तरह के वाहन उसी से होकर गुजरते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इस बात का लोगों ने काफी विरोध किया और मांग किया कि या तो पुल को पूरी तरह से दुरूस्त घोषित कर आवागमन बहाल करें या फिर पूरी तरह से कंडम घोषित कर आवागमन को हमेशा के लिए बंद कर नए पुल का निर्माण करें। लेकिन आज तक इस मुद्दे पर किसी तरह का निर्णय नहीं हो सका है।
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