18 अगस्त 1942 का वो दिन, जब नंदगंज में ट्रेन लूटने वाले 80 क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने एक झटके में गोलियों से भूना, अब तक स्मारक के लिए तरस रहा क्षेत्र
देवकली भारत के इतिहास में 18 अगस्त का दिन हमेशा याद किया जाता है। महात्मा गांधी के करो या मरो के नारे के बाद 18 अगस्त 1942 को नंदगंज क्षेत्र के क्रांतिकारी देश को आजाद कराने के लिए आंदोलन में कूद गए थे। इसलिए इस क्षेत्र के वीर सपूतों का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। लेकिन क्षेत्रीय लोगों को इस बात का अफसोस है कि उन शहीदों की याद में आज तक एक शहीद स्तंभ तक क्षेत्र में नहीं बन सका। इस वर्ष फरवरी में विधानसभा के सत्र में सदर विधायक जयकिशन साहू ने मुद्दा उठाकर शहीदों की याद में शहीद स्तंभ बनाने की मांग की थी। जिसके बाद लोगों में एक उम्मीद जग गई थी कि अब शहीद स्तंभ बन जाएगा लेकिन अब तक किसी तरह की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। बता दें कि नंदगंज क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने पहले नंदगंज थाने में तिरंगा फहराने की योजना बनाई थी। लेकिन तत्कालीन नंदगंज थानाध्यक्ष विजय शंकर पांडेय की डबल गेम के कारण क्रांतिकारियों ने इस प्लान को पूरा करने की बजाय नंदगंज रेलवे स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी के 52 डिब्बे लूट लिए। इसकी सूचना पर मौके पर पहुंचे अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों पर 175 राउंड गोलियां दागीं, जिसमें 100 से अधिक क्रांतिकारी शहीद हो गए और हजारों घायल हो गए थे। अगस्त क्रांति का ऐलान होने के बाद नंदगंज क्षेत्र के लोगों का भी खून खौल उठा था। बाबू भोला सिंह के नेतृत्व में नैसारा के पहलवान रामधारी यादव समेत हजारों लोग भारत माता की जय का उद्घोष करते हुए नंदगंज थाने पर तिरंगा फहराने पहुंच गए। लेकिन वहां के थानाध्यक्ष विजयशंकर पांडेय ने स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी की ओर इशारा कर लोगों को उसे लूटने के लिए प्रेरित कर दिया। जिससे क्रांतिकारियों का हुजूम मालगाड़ी की ओर बढ़ गया। इधर मैनपुर से श्याम नारायण सिंह, करंडा से बचाई सिंह और बलुआ से राम परीखा सिंह आदि भी टोलियां लेकर पहुंच गए। बेलासी के डोमा लोहार ने हथौड़े एवं छेनी से मालगाड़ी के सभी डिब्बों के ताले तोड़ डाले। स्टेशन से पूरब की तरफ तीन किलोमीटर दूर पुलिया तोड़ दिए जाने से रेल मार्ग अवरुद्ध हो गया था। लेकिन उसे ठीक करते हुए अंग्रेज भी मौके पर पहुंच गए। इधर गद्दार थानाध्यक्ष विजयशंकर पांडेय ने दोहरी चाल चलकर अंग्रेजी डीएम व एसपी को इस बात की सूचना दे दी। जिसके चलते मौके पर अंग्रेजों की भारी फोर्स पहुंच गई और गोलीबारी होने लगी। इसके बाद अंग्रेजी पुलिस ने दर्जनों लोगों को पकड़ा और कतार में खड़ा कर उन्हें गोलियों से भून दिया। इस गोलीकांड में 80 लोगों के शहीद होने की पुष्टि भारत छोड़ो आंदोलन की स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुंबई दूरदर्शन ने प्रसारण के जरिए किया था। इधर शहीदों की याद में बाबू भोला सिंह ने नंदगंज में शहीद स्मारक इंटर कॉलेज की नींव रखी थी, जो आज भी मौजूद है और बच्चो को अच्छी शिक्षा दे रहा है। इसके अलावा नंदगंज में इंदिरा बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में एक शहीद स्तंभ है, जिस पर देवकली ब्लॉक के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जालंधर सिंह का नाम लिखा हुआ दिखाई दे रहा है और शेष नाम मिट गए हैं। दुःख इस बात का है कि नंदगंज क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में प्राणों के बलिदान कर इतना बड़ा योगदान दिया, इसके बावजूद ये स्थान आज तक उपेक्षित है।
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