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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

लखीमपुर / वृद्धावस्था में अपनेपन की बाट जोहता 93 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक Read More .......

एकाकी जीवन जीने को मजबूर सेवानिवृत्त शिक्षक जगमोहन लाल
वृद्धावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें अपनों का सहारा मिल जाय तो जीवन खुशनुमा हो जाता है और न मिले तो बचा जीवन नीरस हो जाता है। वृद्ध का शाब्दिक अर्थ है बढ़ा या पका, परिपक्व। यह जीवन की वह अवस्था होती है जिसमें उम्र जीवन के औसत काल के पास होती है। जैसे जैसे वृद्धावस्था बढ़ती है समस्याएं बढ़ती जाती हैं जो स्वाभाविक व प्राकृतिक होती हैं। 
कहते हैं बाल्यकाल एवं वृद्धावस्था का स्वभाव लगभग समान हो जाता है, या यूं कह लीजिए बुढापा बहुधा बचपन का रिगमन होता है। इस वक्त बुजुर्ग की इच्छाएं तो तीव्र हो जाती हैं लेकिन आशाएं सीमित। आंनद एवं कुंठाएं दोनों जन्म लेती हैं। ऐसी दशा में कोई अगर साथ न हो तो बुजुर्ग स्वयं में टूट कर बिखर जाता है। इस अवस्था मे एकाकीपन का जीवन जीते जीते व्यक्ति तमाम अवसादों से घिर कर शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। एकाकीपन का विचार और उस पर तनाव व्यक्ति की आयु अपेक्षाकृत अल्प कर देते हैं। परिवार एवं अपने पन की कमी अखरने के साथ उचित देखभाल भी नही हो पाती इसलिए व्यक्ति अपनी आयु से और अधिक लगने लगता है। असुरक्षा का भाव होने के साथ साथ शारीरिक दुर्बलता एवं मानसिक कमजोरी आ जाती है। कुल मिलाकर इस स्थिति में संबल की बेहद आवश्यकता होती है।
कुछ ऐसा ही लखीमपुर खीरी के लखीमपुर शहर में 93 साल के सेवानिवृत्त जगमोहन लाल की स्थिति देखने से लगा। शहर की आवास विकास कालोनी के रहने वाले बिल्कुल अकेले रहने वाले बुजुर्ग जगमोहन के कोई बच्चे नही हैं, इनकी पत्नी कुछ वर्ष पूर्व अनंत यात्रा पर जा चुकी हैं। आसपडोसी एवं दूर दराज के रिश्तेदार एक बार इलाज करवा कर चले गए। ऐसी नाजुक स्थिति में श्री जगमोहन की बीमार हालत में तीमारदार बना विओम फाउंडेशन बीते कुछ वर्षों से उनकी दवा पानी एवं सेहत की देखभाल सुबह शाम कर रहा है। लेकिन ऐसी अवस्था मे खास कर बीमार अवस्था मे तीमारदार पूर्णकालिक होना चाहिए। जीवन भर देश का भविष्य तराश कर उसे सकारात्मक दिशा देने वाले रिटायर्ड शिक्षक अपनी वृद्धावस्था में एकाकी जीवन जीने को मजबूर हैं। उचित देखभाल एवं एकाकीपन से लगभग टूट से चुके हैं। मानसिक एवं शारीरिक अस्वस्थता से घिरे श्री जगमोहन लाल को आर्थिक अभाव तो नही लेकिन संबल की दरकार है। प्रशासन से मांग करते हैं कि देश के भविष्य को दिशा देने वाले बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षक जगमोहन लाल की शारीरिक अवस्था एवं मनोदशा की तरफ ध्यानाकर्षित करते हुए उनकी वृद्धावस्था में खुशी के रंग भरने के सार्थक प्रयास करें। श्री जगमोहन को किसी ऐसे वृद्धाश्रम या उनके आवास पर ऐसी व्यवस्था की जाय जहां चिकित्सीय व्यवस्था के साथ साथ देखभाल, खान पान एवं अपने पन का एहसास हो।

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