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शनिवार, 31 दिसंबर 2022

विचार प्रवाह / युवाओं को महान बना सकता है श्रेष्ठ चिंतन और उस पर किया गया कार्य

                             धर्मवीर गुप्ता 

      प्रत्येक युवा को प्रातः बिस्तर छोड़ने से पूर्व तथा शाम को सोने से पूर्व एक बार यह चिंतन अवश्य करना चाहिए कि उसका जन्म किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए हुआ है सामान्य जीवन जीने के लिए नहीं, यदि वह प्रतिदिन एक बार इस पर चिंतन करता है तो निश्चित ही वह महानता की ओर बढ़ता है। जितने भी महापुरुष हुए हैं उन्होंने अपने आसपास की सामाजिक, राष्ट्रीय समस्याओं के बारे में चिंतन किया तथा उस समस्या के निदान में वे किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं इस पर चिंतन किया और उस दिशा की ओर कार्य करना शुरू कर दिया। उनके चिंतन तथा किये गये कार्य ने उन्हें श्रेष्ठता की श्रेणी में ला दिया और वे महापुरुष कहलाए। महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, डॉ भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, ईश्वरचंद्र विद्यासागर इसके उदाहरण हैं। यदि ये चिंतन करके समस्या के निदान के लिए कार्य नहीं करते तो शायद महापुरुष नहीं कहलाते। महात्मा गांधी ने जब एक महिला को आधी धोती पहने और आधी धोती धोते  देखा तब उन्होंने चिंतन किया और संकल्प लिया कि वे तब तक एक ही धोती में रहेंगे जब तक कि भारत का एक भी  नागरिक उस स्थिति में रहेगा। इसी प्रकार जब अंबेडकर जी ने देखा कि उनके वर्ग की स्थिति दयनीय है, उनके साथ भेदभाव किया जाता है तब उन्होंने इस पर विचार किया और अपने वर्ग के उत्थान का संकल्प लिया। जीवन भर वे अपने  विचार को साकार करने में लगे रहे और उन्होंने उस वर्ग को सम्मानजनक जीवन जीने का मार्ग दिखाकर उस वर्ग का हित भी किया तथा राष्ट्र का भी हित किया और राष्ट्र को एक विशाल संविधान देने में भी सफल हुए। इसी प्रकार भगत सिंह सुभाष चंद्र बोस ने जब यह देखा कि राष्ट्र गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ है । उन्होंने इस पर चिंतन किया तथा देश को स्वतंत्र कराने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया। मृत्यु का भय उनमें बिल्कुल नहीं था। उनके चिंतन और कृत्य ने देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे मर कर भी अमर हो गये। इसी तरह ईश्वरचंद विद्यासागर ने सामाजिक बुराइयों के बारे में चिंतन किया और उन बुराइयों को दूर करने का निरंतर प्रयास किया। समस्याएं आज भी बहुत सी है जरूरत है उसके निदान हेतु उपायों पर चिंतन और उस पर कार्य की। मैं प्रत्येक युवा का आह्वान करता हूं वे यह चिंतन करें कि उनका जन्म सामान्य या पशुवत जीवन जीने के लिए नहीं हुआ बल्कि उनका जन्म किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए हुआ है । वे अपने आसपास की सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं पर विचार करें और देखें कि वे किस तरह उस समस्या को दूर कर समाज और राष्ट्र का हित कर सकते हैं। वे अपने जीवन का एक निश्चित उद्देश्य बना ले । वे यह दृढ़ संकल्प लें कि वे उस उद्देश्य को पूरा करेंगे। जिस दिन युवाओं ने ऐसा करना शुरू कर दिया उस दिन उनके माता पिता को उन पर गर्व होगा। समाज का प्रत्येक व्यक्ति उनका सम्मान करेगा। राष्ट्र उन्हें धरोहर के रूप में देखेगा और हमारा देश एक विकसित देश होगा एक समस्या मुक्त देश होगा और पुनः विश्व का सिरमौर होगा।

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