बरसात, धूप की परवाह न करते हुए न्याय की आस में लगातार किसानों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे दीपक शुक्ला तिरंगा महाराज को आज भी निराशा हांथ लगी। बारिश की वजह से धरना स्थल जलमग्न हो गया।
उल्लेखनीय है कि काफी समय से गोमती नदी में किसानों की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगा रहे हैं। जिसकी लिखित शिकायत स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री से भी कर चुके हैं। तिरंगा महाराज स्वयं को मोदी भक्त व भाजपा मीडिया प्रभारी बताते/लिखते हैं। न्याय मिलता न देख उन्होंने 40 दिन पूर्व अहिंसा पूर्वक अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता चुना था। गोमती नदी में व किसानों की जमीन पर अवैध कब्जे की जांच के साथ इटौंज क्षेत्र के विकास सम्बन्धी तीन मांगे और हैं उनकी। जिनमे रेल पड़ाव को पूर्ण स्टेशन का दर्जा दिया जाना व इटौंजा में बस ठहराव बनाया जाना प्रमुख हैं।
तिरंगा महाराज के इस आंदोलन के बाद शासन, प्रशासन से आश्वासन तो मिले लेकिन कार्रवाई अब तक नही हो पायी है। उधर मौसम के बदलते मिजाज व धरना स्थल पर जलभराव से तिरंगा महाराज अस्वस्थ भी नजर आ रहे हैं। इस विषय पर शासन व प्रशासन कतई नही चेत रहा है। उनकी अगुवाई में बैठे किसानों को भी संक्रमण जनित रोगों से ग्रसित होने का खतरा है। अब सवाल यह है कि जब अपने समर्पित सिपाही को भाजपा न्याय नही दिला पा रही है तो आमजन का क्या होगा?
आखिर इतने दिनों से राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे पुल के नीचे, पुलिस थाने से चंद कदमो की दूरी पर चल रहे धरने में सम्मिलित लोगो के साथ अनहोनी हो जाय तो उसका जिम्मेदार कौन? शासन प्रशासन क्यों है मौन? उधर तिरंगा महाराज ने इस बीच अपनी असुरक्षा की भी चिंता जाहिर की है।
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