हिंदी बढ़ नही सकती केवल हिंदी दिवस मनाने से।
भाषा का उत्थान निहित है अद्भुत अलख जगाने से।
कविताओं में सार छिपे हैं हिंदी की वर्णमाला से।
भेदभाव के भाव मिटे है हिंदी की मधुशाला से।
कुरूक्षेत्र व रश्मिरथी ये पावन कृतियाँ हिंदी की।दिनकर और निराला जैसी है कुछ स्मृतियां हिंदी की।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments