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शनिवार, 17 सितंबर 2022

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस विशेष : लखीमपुर डायलिसिस परिवार की करुण पुकार

एक बार फिर बारिश बनी डायलिसिस मरीजों के लिए आफत। छाउछ चौराहे के पास हुए जलभराव से सरकारी अस्पताल में बने डायलिसिस सेंटर की बिजली गुल हो गयी। तमाम अव्यवस्थाओं से ग्रसित इस सेंटर में बिजली आपूर्ति न होने से डायलिसिस को अस्थायी रूप बन्द करना पड़ा। सेंटर में मरीज से मैनेजर तक सभी के द्वारा किये गए पूर्ण प्रयासों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग न चेता।
सेंटर मैनेजर के मरीजोपयोगी आग्रह को अनदेखा करने वाला यह स्वास्थ्य विभाग शायद इंसानी जिंदगियों से ज्यादा जेनरेटर चबूतरे के खर्चे को महत्वपूर्ण समझता है। किसी भी विषम परिस्थिति के आने पर सेंटर को पूर्ण रूप से बन्द करने का आह्वान करने वाला स्वास्थ्य विभाग अपने उद्देश्यों से आखिर पीछे क्यों भागता है ? यह समझ से परे है। एक आम मरीज के लिए ततपरता से जुटा यह स्वास्थ्य विभाग आखिर डायलिसिस मरीजों के साथ इतना भावशून्य क्यों?
बिना बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के चल रहे इस डायलिसिस सेंटर के बारे में पूछने पर सेंटर मैनेजर ने बताया कि वह स्वास्थ्य विभाग के सम्बंधित अधिकारियों से इस विषय पर कई बार आग्रह कर चुके हैं लेकिन जेनरेटर लगवाने की लिखित अनुमति नही दी गयी है और न ही जेनरेटर लगवाने के लिए चबूतरा बनवाने की लिखित अनुमति अब तक मिल पायी है।
इस अव्यवस्था के चलते अपनी जिंदगियों से खेलने को मजबूर डायलिसिस मरीज लगातार 2 दिन से डायलिसिस सेंटर के एक फोन कॉल के इंतजार में बैठे हैं। ये परेशानी अगर किसी आम मरीज की होती तो मरीजों के परिवार अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गए होते। किंतु जनाब इस बीमारी से ग्रसित परिवार का हर सदस्य किसी न किसी धरने पर उसी दिन बैठ जाता है जब घर के मुखिया की पहली डायलिसिस लगती है। वो धरना घर की आर्थिक स्थिति बच्चों की शिक्षा एवं परिवार की सुरक्षा और सबसे बड़ा धरना मरीज को संबल प्रदान करना होता है। और यह धरने अस्पताल के सामने के दिए जाने वाले धरनो से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। क्या हम आम व्यक्ति इन डायलिसिस मरीजों के इस धरने को निःस्वार्थ भाव से मजबूत बनाकर अपने सामाजिक दायित्व की पूर्ति नही कर सकते।
डायलिसिस सेंटर पर अव्यवस्थाओं का आलम तो यह है कि सेंटर पर आज तक एक भी गुर्दा रोग विशेषज्ञ किसी मरीज से रूबरू नही हुआ। सेंटर तो छोड़िए सरकारी अस्पताल में भी किसी नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति नही हो पायी है। काबिले तारीफ है सेंटर मैनेजर की टीम जो अपनी कार्यकुशलता से इन अभावों के बीच भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है।

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