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शनिवार, 24 सितंबर 2022

सस्ती लोकप्रियता बटोरने की खातिर भगवान चित्रगुप्त के अशोभनीय प्रदर्शन को लेकर थैंक गॉड के खिलाफ लामबंद हुआ कायस्थ समाज

●  चंडीगढ़/ कायस्थ सभा ने भी फ़िल्म "थैंक गॉड" पर जताई आपत्ति


●  हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करना बॉलीवुड की पुरानी आदत : जेपी श्रीवास्तव


●  फ़िल्म को बैन करने के मुद्दे पर चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के चित्रांश एकजुट : अंजलि श्रीवास्तव


●  जरूरत पड़ने पर हमारी सभा प्रदर्शन करने के लिए भी तैयार : कृष्णदेव विद्यार्थी
●  कायस्थ सभा न्यायसंगत कार्रवाई के लिए भी तैयार : संजीव सिन्हा


●  कलमधारी कायस्थ सहनशील है, कमजोर नहीं : टीपी श्रीवास्तव


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चंडीगढ़ : बॉलीवुड फ़िल्म "थैंक गॉड" के टेलर में कायस्थ सामाज के इष्टदेव भगवान श्री चित्रगुप्त जो को अशोभनीय रूप से प्रदर्शित किया गया । ट्रेलर में कायस्थों के कुलदेवता भगवान चित्रगुप्त को सूट बूट पहनकर कम वस्त्र पहने लड़कियों के इर्द गिर्द रहते हुए, काम-वासना आदि पर चर्चा करते हुए, चुटकुले सुनाते हुए तथा पृथ्वी के मनुष्य के साथ गेम खेलते हुए दिखाया गया है जो कि बिलकुल अनुचित है तथा इससे करोड़ों कायस्थों की भावनाएं आहत हुई ।
चंडीगढ़ ट्राइसिटी के कायस्थ सभा की टीम ने ने भी इस फ़िल्म का विरोध किया है । पिछले दिनों सभा के अध्यक्ष जेपी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में अपने कार्यकारिणी की एक ऑनलाइन बैठक में सबने मिलकर इस फ़िल्म के बहिष्कार करने का निर्णय लिया । ऑनलाइन बैठक में सभा के अध्यक्ष जेपी श्रीवास्तव के अलावे हृदयेश श्रीवास्तव, विनय श्रीवास्तव, चंद्रशेखर श्रीवास्तव, आलोक श्रीवास्तव, अंजलि श्रीवास्तव, संजीव सिन्हा, एसपी श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, विजेश सिन्हा, पूजा पल्लवी, टीपी श्रीवास्तव, शक्ति श्रीवास्तव, कृष्णदेव विद्यार्थी, अमित वर्मा आदि लोगों ने भाग लिया । 
बाद में जेपी श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ बालीवुड की आदत बन गई है। हिन्दू देवी-देवताओं का परिहास एवं उन्हें पर्दे पर विभिन्न अशोभनीय रुप में प्रदर्शित करना बालीवुड अपनी शान समझता है । 
अंजलि श्रीवास्तव ने बताया कि भगवान चित्रगुप्त का जन्म ब्रम्हा जी की काया से हुआ था। पद्म पुराण के अनुसार धर्मराज, यमराज और चित्रगुप्त आदि शक्ति परमेश्वर परम पुरुष विभिन्न कार्यो के लिए अलग-अलग से निर्धारित हैं । सृष्टि के समस्त प्राणियों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखनेवाले एवं प्राणियों द्वारा पृथ्वी पर किए गए समस्त कर्मो का न्याय- संगत विचार कर उनके भविष्य का निर्धारण करने वाले श्री चित्रगुप्त न्यायाधीश हैं। ऐसे में भगवान चित्रगुप्त को अशोभनीय रुप में प्रदर्शित करना अनुचित एवं निंदनीय है। इसलिए पूरे देश के चित्रांश इस फ़िल्म को बैन करने के मुद्दे पर एकजुट हैं ।
कृष्णदेव विद्यार्थी ने कहा कि अगर हमारी माँग को फ़िल्म की टीम एवं प्रशासन हल्के में लेगा तो हमारी सभा प्रदर्शन करने के लिए भी तैयार है । सरकार एवं फ़िल्म की टीम इसपर शीघ्र विचार करना चाहिए ।
संजीव सिन्हा ने कहा कि शीघ्र ही  अगर फ़िल्म की टीम ने हमारी माँग पर विचार नहीं किया तो हमारी सभा द्वारा न्यायसंगत कार्रवाई भी की जाएगी । हमारी सभा इस प्रक्रिया के लिए भी विचार कर रही है ।
टीपी श्रीवास्तव ने कहा कि कलमधारी कायस्थों की सहनशीलता को उनकी कमजोरी नहीं समझनी चाहिए । बालीवुड में हिन्दू देवी-देवताओं का परिहास अविलंब समाप्त होना चाहिए तथा सेंसर बोर्ड को ऐसे सिनेमाओं को रिलीज होने का सर्टिफिकेट नहीं देना चाहिए ।

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