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सोमवार, 24 अगस्त 2026

Lmp. अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने बुनी समाजहित की नई रूपरेखा

⚫ अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने बुनी समाजहित की नई रूपरेखा

लखीमपुर खीरी। लेखनी के देवता भगवान चित्रगुप्त की स्तुति से सजी शाम उस समय सामाजिक चेतना की दीपशिखा बन उठी, जब अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, लखीमपुर खीरी की आवश्यक बैठक महासभा संरक्षिका एवं पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव के आवास पर संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता महासभा अध्यक्षा डॉ. मंजुला बरतरिया ने की, जबकि संचालन महामंत्री आशीष प्रताप श्रीवास्तव ने किया।

बैठक केवल औपचारिक विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाजसेवा, संस्कार और पर्यावरणीय चेतना को नई दिशा देने वाले संकल्पों की प्रयोगशाला बन गई। आगामी शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के सम्मान को गरिमा और कृतज्ञता के साथ मनाने की रणनीति तैयार की गई। साथ ही वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक दायित्व के रूप में आगे बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। महासभा की सदस्यता बढ़ाने और संगठन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि कोई भी संगठन केवल पदों से नहीं, बल्कि समर्पित कार्यकर्ताओं की सक्रियता, आपसी विश्वास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व से जीवंत रहता है। महासभा संरक्षिका एवं पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव एवं अध्यक्षा डॉ. मंजुला बरतरिया ने अपने प्रेरणादायी और भावनात्मक संदेश में समाज को एकजुट होकर सेवा, शिक्षा, पर्यावरण और संस्कारों के क्षेत्र में सार्थक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, सक्रियता और सकारात्मक सोच में निहित है। 

बैठक में डॉ. नमिता श्रीवास्तव, मीना पांडिया, नीरज सक्सेना, शरद श्रीवास्तव, आदर्श सक्सेना, शौर्य सक्सेना, सुधाकर लाला, प्रशांत लाला, श्याम मोहन, संजय रायजादा, यश लाला, नवीन श्रीवास्तव, नरेंद्र श्रीवास्तव सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का संदेश स्पष्ट था चित्रगुप्त की लेखनी केवल इतिहास लिखने के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान को बेहतर और भविष्य को संस्कारित बनाने के लिए भी है। इसी विचार के साथ महासभा ने सेवा, सम्मान, हरियाली और संगठनात्मक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाने का संकल्प लिया।

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