⚫ भारत–नेपाल सीमांत परिप्रेक्ष्य एवं परिदृश्य” पुस्तक का विमोचन
“भारत–नेपाल सीमांत परिप्रेक्ष्य एवं परिदृश्य” पुस्तक का विमोचन परम आदरणीय श्री कौशल जी भाईसाहब, प्रांत प्रचारक, अवध प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कर-कमलों द्वारा एक गरिमामय एवं आत्मीय अवसर पर किया गया। इस अवसर पर नेपाल से आए कुछ गणमान्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े बंधुओं की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक नीरज कुमार सिंह ने पुस्तक की विषयवस्तु, उद्देश्य एवं लेखन की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उपस्थित अतिथियों को पुस्तक के विभिन्न पक्षों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि “भारत–नेपाल सीमांत परिप्रेक्ष्य एवं परिदृश्य” केवल सीमावर्ती क्षेत्रों के भौगोलिक अथवा प्रशासनिक पक्षों का अध्ययन नहीं है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से विद्यमान सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं आत्मीय संबंधों को समझने का एक प्रयास है। पुस्तक में सीमांत क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों, चुनौतियों, संभावनाओं तथा दोनों देशों के पारस्परिक संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को विभिन्न आयामों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक में थारू जनजाति तथा सीमांत क्षेत्र में उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का भी विशेष उल्लेख किया गया है। थारू समाज के उत्थान, संरक्षण एवं विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तित्वों एवं उनके कार्यों की जानकारी भी पुस्तक में संकलित की गई है।
इसके साथ ही पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में किए जा रहे विभिन्न सामाजिक एवं राष्ट्रहितकारी कार्यों का भी विस्तृत वर्णन किया गया है। सीमांत क्षेत्रों में समाज के बीच संपर्क, सेवा, जागरूकता, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को पुस्तक में व्यापक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है।
इस पुस्तक को पूर्व में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी का शुभाशीष भी प्राप्त हो चुका है, जो इस कृति के लिए विशेष गौरव एवं प्रेरणा का विषय है।
इस अवसर पर परम आदरणीय श्री कौशल जी भाईसाहब ने पुस्तक के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “भारत–नेपाल सीमांत परिप्रेक्ष्य एवं परिदृश्य” भारत–नेपाल के संबंधों को समझने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी कृति है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में भारत–नेपाल सीमा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों एवं समस्याओं का तथ्यपरक उल्लेख करते हुए उनके संभावित समाधान और भविष्य की दिशा पर भी सार्थक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक दोनों देशों के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आत्मीय संबंधों को समझने के साथ-साथ सीमांत क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों और चुनौतियों को जानने में भी उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक भारत–नेपाल संबंधों को और अधिक सुदृढ़, आत्मीय एवं सकारात्मक दिशा प्रदान करने के लिए प्रेरणा देने वाली है।
लेखक ने इस अवसर पर परम आदरणीय श्री कौशल जी भाईसाहब का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका स्नेह, मार्गदर्शन एवं शुभाशीष इस पुस्तक के लिए विशेष प्रेरणास्रोत है। उनके कर-कमलों से पुस्तक का विमोचन होना लेखक के लिए अत्यंत गौरव एवं सौभाग्य का विषय है।
इस अवसर पर कार्यकर्ता, सामाजिक बंधु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। नेपाल से आए बंधुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष आत्मीयता प्रदान की।
यह विमोचन भारत–नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आत्मीय संबंधों को समझने और उन्हें और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं स्मरणीय अवसर रहा।
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