🔘 पेंशनर्स के विश्राम कक्ष पर 'डबल लॉक' का पहरा! बुजुर्गों के अधिकारों पर लगा ताला, प्रशासन से न्याय की गुहार
लखीमपुर खीरी। जीवनभर सरकारी सेवा देकर व्यवस्था को मजबूत करने वाले बुजुर्ग पेंशनरों को अब अपने ही विश्राम कक्ष के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था, जनपद शाखा लखीमपुर खीरी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि पेंशनर्स के लिए बनाए गए विश्राम कक्ष का बार-बार डबल लॉक के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे हजारों बुजुर्ग पेंशनरों को भारी असुविधा और अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
संस्था के अध्यक्ष डॉ. ओ.पी. श्रीवास्तव एवं महामंत्री नरेश चन्द्र वर्मा द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जिला कोषागार परिसर स्थित पुरुष एवं महिला पेंशनर्स विश्राम कक्ष शासन की मंशा के अनुरूप केवल पेंशनरों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। लेकिन समय-समय पर इन कमरों में परीक्षा सामग्री रखकर उन्हें डबल लॉक कर दिया जाता है, जिससे पेंशनर्स भवन कई दिनों तक बंद रहता है और दूर-दराज़ से आने वाले बुजुर्गों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी इस समस्या को तत्कालीन जिलाधिकारी के समक्ष उठाया गया था। उस समय वरिष्ठ कोषाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि पेंशनर्स विश्राम कक्ष का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए न किया जाए। इसके बावजूद फिर वही स्थिति उत्पन्न होने से पेंशनर्स में गहरी नाराज़गी और निराशा है। संस्था ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पेंशनर्स विश्राम कक्ष को तत्काल डबल लॉक व्यवस्था से मुक्त कराया जाए तथा भविष्य में किसी भी परिस्थिति में इन कमरों का उपयोग अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए न किया जाए। उनका कहना है कि शासन ने यह सुविधा बुजुर्ग पेंशनर्स के सम्मान और विश्राम के उद्देश्य से उपलब्ध कराई है, इसलिए इसकी मूल भावना को अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए।
पेंशनर्स का दर्द केवल एक कमरे का नहीं, बल्कि उस सम्मान का है जिसके वे जीवनभर की सेवा के बाद वास्तविक हकदार हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या बुजुर्गों के अधिकारों पर लगा यह "ताला" खुलेगा या फिर उन्हें अपने ही विश्राम कक्ष के लिए संघर्ष जारी रखना पड़ेगा।
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