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शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

Lmp. स्कूल टाइमिंग बदलने की उठी जोरदार मांग, लाखों बच्चों और शिक्षकों को मिल सकती है राहत

⚫ स्कूल टाइमिंग बदलने की उठी जोरदार मांग, लाखों बच्चों और शिक्षकों को मिल सकती है राहत

⚫ परिषदीय विद्यालयों की समय-सारिणी पर बड़ा सवाल, महिला शिक्षक संघ ने दिया ज्ञापन

लखीमपुर खीरी, 17 जुलाई। समय की रफ्तार केवल घड़ी की सुइयों को नहीं बदलती, बल्कि व्यवस्थाओं से भी बदलाव की अपेक्षा करती है। जब परिस्थितियां बदल जाएं, जलवायु नई चुनौतियां खड़ी कर दे और बच्चों की जरूरतें पहले जैसी न रहें, तब शिक्षा व्यवस्था को भी संवेदनशीलता के साथ स्वयं को बदलना पड़ता है। इसी सोच को स्वर देते हुए उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने परिषदीय विद्यालयों के संचालन समय में पुनः संशोधन की मांग उठाकर शिक्षा व्यवस्था को अधिक मानवीय और व्यवहारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।

जिला अध्यक्ष आभा शुक्ला एवं महामंत्री डॉ. नमिता श्रीवास्तव के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को भेजे गए ज्ञापन में आग्रह किया गया है कि कक्षा 1 से 8 तक संचालित परिषदीय विद्यालयों का समय पूर्व व्यवस्था के अनुसार ग्रीष्मकाल में प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक तथा शीतकाल में प्रातः 9:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक निर्धारित किया जाए। 

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई समय-सारिणी उस समय की आवश्यकता थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वह विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के हितों के अनुरूप नहीं रह गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना, बदलती जलवायु, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय परिवर्तन अब एक आवश्यक कदम बन चुका है। 

महिला शिक्षक संघ ने अपने पत्र में छोटे बच्चों, महिला शिक्षकों तथा दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले शिक्षकों की कठिनाइयों को भी प्रमुखता से उठाया है। भीषण गर्मी, लंबी यात्राएं और पारिवारिक दायित्वों के बीच वर्तमान समय-सारिणी कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न कर रही है। इसका असर केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्याह्न भोजन, खेलकूद, सह-शैक्षिक गतिविधियों और शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। 

संघ का विश्वास है कि प्रस्तावित समय-सारिणी लागू होने से विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, शिक्षकों की कार्यक्षमता में सकारात्मक सुधार होगा और शिक्षा का वातावरण अधिक प्रभावी, सहज एवं परिणामकारी बनेगा। इससे अभिभावकों को भी बड़ी राहत मिलेगी और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का नया अध्याय शुरू होगा। यह मांग केवल विद्यालय खुलने और बंद होने के समय की नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बच्चों की मुस्कान, शिक्षकों की गरिमा और अभिभावकों की सुविधा से जोड़ने का प्रयास है। अब निगाहें प्रदेश सरकार पर हैं कि वह इस संवेदनशील मांग को कितनी शीघ्रता और गंभीरता से स्वीकार कर लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को राहत प्रदान करती है।

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