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रविवार, 19 जुलाई 2026

DM के हलफनामे के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, तिरंगा महाराज ने गैंगस्टर एक्ट, NSA में FIR और CBI जांच की उठाई मांग

🔘 DM के हलफनामे के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, तिरंगा महाराज ने गैंगस्टर एक्ट, NSA में FIR और CBI जांच की उठाई मांग

लखनऊ। गोमती नदी के कथित अतिक्रमण का मामला अब केवल पर्यावरणीय विवाद नहीं, बल्कि कानून, प्रशासन और न्यायिक जवाबदेही की कसौटी बनता दिखाई दे रहा है। समाजसेवी दीपक शुक्ला 'तिरंगा महाराज' ने मलिहाबाद तहसीलदार को लिखित तहरीर देकर नीलांश वाटर पार्क के संचालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे प्रकरण को एक संगठित आर्थिक एवं पर्यावरणीय अपराध बताया है।

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि गोमती नदी की सरकारी भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण कर उसके प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया गया, जिससे नदी की पारिस्थितिकी को गंभीर क्षति पहुँची। उन्होंने मांग की है कि मामले में भारतीय न्याय संहिता-2023, उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम तथा धन शोधन निवारण अधिनियम सहित संबंधित प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई करते हुए गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए।

तिरंगा महाराज ने अपनी तहरीर में लखनऊ खंडपीठ में लंबित जनहित याचिका संख्या 10/2024 का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जिलाधिकारी द्वारा न्यायालय में दाखिल शपथपत्र में कथित अतिक्रमण की पुष्टि की जा चुकी है। साथ ही उन्होंने न्यायालय के 15 मई 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, फिर भी यदि कार्रवाई पूरी नहीं हुई तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।

उन्होंने मांग की कि आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ उनकी चल-अचल एवं कथित बेनामी संपत्तियों को कुर्क किया जाए तथा CBI या SIT से निष्पक्ष जांच कराकर वर्ष 2007 से 2026 तक अर्जित संपत्तियों की विस्तृत जांच कराई जाए।
तहरीर में तिरंगा महाराज ने कहा कि "नदी किसी व्यक्ति की नहीं, समाज और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा कर व्यावसायिक लाभ कमाया गया है तो यह केवल पर्यावरण का नहीं, जनता के अधिकारों का भी प्रश्न है।"

सूत्रों के अनुसार, तहसीलदार ने तहरीर पर संज्ञान लेते हुए SHO मलिहाबाद को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। तहरीर पर 18 जुलाई 2026 की तारीख अंकित है।
यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई, न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन और जांच एजेंसियों की संभावित भूमिका को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

नोट: यह समाचार उपलब्ध तहरीर और उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

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