⚫ 'महाकवि बाण सम्मान' से अलंकृत हुईं खीरी की गौरवशाली कवियित्री कृति श्रीवास्तव
लखीमपुर खीरी। जब शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और समाज की आत्मा बन जाएँ, तब साहित्य साधना का प्रत्येक पड़ाव इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों पर दर्ज हो जाता है। ऐसा ही गौरवपूर्ण क्षण गत रविवार लखनऊ में आयोजित "महाकवि कीर्तिशेष पंडित छैल बिहारी वाजपेयी 'बाण' पुण्य स्मृति एवं महाकवि बाण अलंकरण समारोह 2026" के दौरान साकार हुआ, जब लखीमपुर खीरी की उदीयमान एवं प्रतिष्ठित कवियित्री कृति श्रीवास्तव को उनकी साहित्यिक साधना और रचनात्मक योगदान के लिए "महाकवि बाण सम्मान" से अलंकृत किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने करकमलों से कृति श्रीवास्तव को सम्मान प्रदान करते हुए उनके साहित्यिक अवदान की सराहना की। यह सम्मान केवल एक कवियित्री की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे खीरी जनपद की साहित्यिक चेतना, सृजनशीलता और सांस्कृतिक गौरव का सम्मान बन गया।
समारोह में प्रख्यात ओज कवि डॉ. हरिओम पंवार गजेंद्र सोलंकी, सुरेश अवस्थी, सौरभ जैन 'सुमन', रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी, प्रख्यात मिश्रा, विख्यात मिश्रा, व्याख्या मिश्रा, कमल आग्नेय, मयंक गुलाटी सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिन्हें इस विशेष सम्मान से विभूषित किया गया।
देशभर से आए साहित्य साधकों के मध्य आयोजित इस गरिमामयी समारोह में अनेक ख्यातिप्राप्त कवियों को भी सम्मानित किया गया। कृति श्रीवास्तव को मिले इस प्रतिष्ठित सम्मान से लखीमपुर खीरी के साहित्य प्रेमियों, कवियों और बुद्धिजीवियों में हर्ष एवं गौरव का वातावरण है। साहित्य जगत का मानना है कि यह उपलब्धि नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए प्रेरणा का दीप बनेगी और जनपद की साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाएगी।
यह सम्मान इस सत्य का जीवंत प्रमाण है कि समर्पित साधना, संवेदनशील लेखनी और सृजन के प्रति अटूट निष्ठा अंततः समाज और साहित्य दोनों के हृदय में अपना स्थायी स्थान बना ही लेती है। कृति श्रीवास्तव की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत साहित्यिक सफर का स्वर्णिम अध्याय है, बल्कि खीरी की सांस्कृतिक विरासत के माथे पर सजा एक गौरवशाली मुकुट भी है।
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