⚫ पूर्णिमा की संध्या पर जागेगा जल-संकल्प, दीपों से दमकेगा नदी पुनर्जीवन महाअभियान
दैनिक जनजागरण न्यूज डेस्क 📞 8800127319. लखीमपुर खीरी की धरती एक बार फिर प्रकृति, संस्कृति और जनचेतना के अद्भुत संगम की साक्षी बनने जा रही है। पूर्णिमा की पावन संध्या पर सेठ घाट का तट केवल दीपों से नहीं, बल्कि जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के सामूहिक संकल्प से आलोकित होगा।
30 मई को आयोजित होने वाला यह विशेष आरती कार्यक्रम मात्र धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उस संवेदना का महाअभियान है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ नदियाँ, सुरक्षित जल और जीवंत प्रकृति का स्वप्न संजोए हुए है। जब समाज अपनी नदियों के लिए खड़ा होता है, तब केवल घाट नहीं सजते, बल्कि उम्मीदें जगमगाने लगती हैं। हर दीपक यह संदेश देगा कि “नदियाँ हैं तो कल है।” हर पुष्प प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेगा और हर सहभागी जल बचाने की प्रतिज्ञा के साथ इस अभियान का प्रहरी बनेगा।
सायं 6 बजे से सेठ घाट पर होने वाली यह महाआरती भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को पुनर्जीवित करेगी, जहाँ प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि माँ का स्वरूप माना गया है। आयोजकों ने सभी पर्यावरण प्रेमियों से परिवार सहित भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित होने का आह्वान किया है, ताकि यह आयोजन जनभागीदारी का प्रेरणादायी उत्सव बन सके।
कार्यक्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से पाँच दीपक, तेल, बत्ती, माचिस और ताजे पुष्प लाने का अनुरोध किया गया है। यह केवल सहभागिता नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रतीक होगा।
सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस जनचेतना को व्यापक बनाने की अपील की गई है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे 30 सेकंड का भावनात्मक वीडियो संदेश बनाकर नदी स्वच्छता और जल संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुँचाएँ।
यह अभियान बताता है कि बदलाव केवल सरकारों से नहीं, समाज के जागृत हृदयों से आता है। आइए, हम सब मिलकर अपनी नदियों को नया जीवन दें, क्योंकि जब नदियाँ मुस्कुराती हैं, तभी भविष्य सुरक्षित होता है।
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