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शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

यह मात्र प्रदर्शनी नहीं, बल्कि गरिमा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है : डॉ. वीरेन्द्र कुमार

*”यह मात्र प्रदर्शनी नहीं, बल्कि गरिमा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है” —डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने चंडीगढ़ में 29वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन किया*

चंडीगढ़, 14 फ़रवरी 2026: “यह मात्र प्रदर्शनी नहीं, बल्कि गरिमा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है।” इन प्रभावशाली शब्दों के साथ डॉ. वीरेन्द्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, ने आज चंडीगढ़ के एग्ज़ीबिशन ग्राउंड में 29वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने इस मेले को एक परिवर्तनकारी अभियान बताते हुए कहा कि यह देशभर के दिव्यांगजनों के जीवन में आशा की नई किरण बनकर उभरा है और समावेशी विकास तथा समान अवसर के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

साल 2014 के बाद सशक्तिकरण की यात्रा का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपमानजनक शब्दावली से हटकर “दिव्यांग” जैसे सम्मानजनक शब्द का प्रयोग केवल भाषा का परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण का परिवर्तन था। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का लागू होना, दिव्यांगता की श्रेणियों का विस्तार तथा ‘सुगम्य भारत अभियान’ के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों को सुलभ बनाने के प्रयासों ने गरिमा, पहुंच और सहभागिता की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चा सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता से सुनिश्चित होता है। दिव्य कला मेला इसी सोच का साकार रूप है, जो दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों की प्रतिभा को सीधे बाजार से जोड़ता है।

श्री सतनाम सिंह संधू,  माननीय राज्यसभा सांसद, ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति के अनुरूप दिव्यांगजनों को सम्मान देना एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सम्मान के साथ सशक्तिकरण आवश्यक है। “रोजगार और आत्मनिर्भरता के बिना गरिमा अधूरी है,” उन्होंने कहा और दिव्य कला मेला जैसे मंचों की सराहना की, जो विशेषकर दूर-दराज़ के दिव्यांग युवाओं को अपने उत्पाद प्रदर्शित और विपणन करने का अवसर प्रदान करते हैं।

श्री सौरभ जोशी, चंडीगढ़ के महापौर, ने इस अवसर को प्रतिभा, आत्मविश्वास और मानवीय क्षमता का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में दिव्य कला मेला, दिव्य कला शक्ति और रोजगार मेले का आयोजन समावेशन के प्रति शहर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह संदेश देता है कि दिव्यांगता कोई सीमा नहीं, बल्कि विशिष्ट क्षमता की पहचान है।

अपने स्वागत भाषण में श्री राजीव शर्मा संयुक्त सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD), ने इस पहल के ठोस आर्थिक प्रभाव को रेखांकित किया। पिछले तीन वर्षों में विभिन्न शहरों में आयोजित दिव्य कला मेलों के माध्यम से ₹2366.43 लाख का उल्लेखनीय व्यापार दर्ज किया गया है, जो दिव्यांग उत्पादों की बढ़ती बाजार स्वीकृति और उद्यमशीलता की क्षमता को प्रमाणित करता है। उन्होंने कहा कि ये मेले केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि आर्थिक समावेशन और आत्मनिर्भरता के सशक्त माध्यम हैं।

चंडीगढ़ में आयोजित 29वें दिव्य कला मेले में श्रीमती अनुराधा एस. चगती, सचिव, सामाजिक कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास विभाग, चंडीगढ़; श्री विनीत राणा, मुख्य महाप्रबंधक, NDFDC; श्री एम. के. साहू, सहायक महाप्रबंधक, NDFDC सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अब तक देश के 28 स्थानों पर दिव्य कला मेलों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें लगभग 2,362 दिव्यांग उद्यमियों ने भाग लिया और सामूहिक रूप से ₹23 करोड़ से अधिक की आय अर्जित की — जो समावेशी उद्यमिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इन मेलों के माध्यम से सरकार ने दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहित करने हेतु ₹20 करोड़ से अधिक के ऋण भी स्वीकृत किए हैं। साथ ही आयोजित रोजगार मेलों में अब तक 3,131 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 1,007 प्रतिभागियों को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से अधिक को रोजगार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

चंडीगढ़ मेले में लगभग 75 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें दिव्यांग उद्यमियों के साथ-साथ भारत सरकार की संस्थाओं और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी है। 19 फरवरी 2026 को दिव्यांगजनों के लिए एक विशेष रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा। आगंतुक ALIMCO स्टॉल पर सहायक उपकरणों के लिए पंजीकरण कर सकते हैं, जबकि विभिन्न संस्थाएँ सशक्तिकरण से संबंधित नवाचार और नई पहलों का प्रदर्शन कर रही हैं। बोच्चिया, ब्लाइंड क्रिकेट जैसे समावेशी खेलों तथा प्रतिदिन आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मेला जीवंत बना हुआ है। 21 फरवरी 2026 को “दिव्य कला शक्ति” शीर्षक से विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी।

चंडीगढ़ में आयोजित यह मेला केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक सशक्त आंदोलन है — जो यह संदेश देता है कि जब दिव्यांगजन आर्थिक रूप से सशक्त होते हैं, तो वे परिवार, समाज और राष्ट्र को भी सशक्त बनाते हैं। दिव्य कला मेला एक समावेशी भारत की दिशा में निरंतर अग्रसर है, जहाँ गरिमा, अवसर और आत्मनिर्भरता साथ-साथ चलते हैं।

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