ज्ञान, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण की संकल्प-यात्रा: नाइपर, मोहाली ने मनाया 28वां स्थापना दिवस
मोहाली। ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की उज्ज्वल परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर), मोहाली ने सोमवार को अपना 28वां स्थापना दिवस अत्यंत गरिमा, उत्साह और प्रेरक वातावरण में मनाया। यह अवसर केवल एक संस्थान के गौरवशाली इतिहास का उत्सव नहीं था, बल्कि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और औषधि क्षेत्र में अग्रणी बनाने के संकल्प की पुनर्पुष्टि भी था।
निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि भारत को अनुसंधान और उसके व्यावहारिक रूपांतरण में उत्कृष्टता प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना होगा। इसी दिशा में उन्होंने बायोफार्मास्यूटिकल्स तथा रेगुलेटरी साइंसेज़ में दो नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की घोषणा करते हुए शैक्षणिक नवाचार की नई राह प्रशस्त की। उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों, पेटेंट, अनुसंधान अनुदान, प्लेसमेंट और सामाजिक सहभागिता का उल्लेख करते हुए नाइपर को उद्योग-संबद्ध शिक्षा का सशक्त केंद्र बताया। मुख्य अतिथि प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने औषधीय पौधों की संभावनाओं पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए प्रकृति और विज्ञान के समन्वय से मानव जीवन को स्वस्थ और समृद्ध बनाने का संदेश दिया। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. चंद्रशेखर नायर ने स्वदेशी तकनीक और नवाचार के बल पर भारत को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया। समारोह की विशेष उपलब्धि रही रोश प्रोडक्ट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड तथा विनायक मिशन के अनुसंधान फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, जिससे शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच सेतु मजबूत हुआ। यह साझेदारी विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और वैश्विक अवसरों से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
प्रतियोगिताओं, सम्मान समारोह और प्रेरक व्याख्यानों से सुसज्जित यह आयोजन न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का उत्सव बना, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्रसेवा और नवाचार के संकल्प का दीप भी प्रज्ज्वलित कर गया।नाइपर, मोहाली का यह 28वां स्थापना दिवस एक संदेश छोड़ गया ज्ञान से सशक्त भारत, अनुसंधान से समृद्ध भारत और नवाचार से आत्मनिर्भर भारत।
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