Breaking

शनिवार, 31 जनवरी 2026

दिल्ली : यूजीसी एक्ट के विरोध में ‘S-4’ का ऐलान, 8 मार्च को रामलीला मैदान में महाआंदोलन की चेतावनी

🔘 सवर्ण समाज की एकजुट हुंकार : यूजीसी एक्ट के विरोध में ‘S-4’ का ऐलान, 8 मार्च को रामलीला मैदान में महाआंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026। वर्तमान समय में सवर्ण समाज की बढ़ती उपेक्षा, सामाजिक आर्थिक असंतुलन और नीतिगत भेदभाव के विरुद्ध आज राजधानी दिल्ली के मालवीय स्मृति भवन में एक ऐतिहासिक बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में “सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)” के गठन की औपचारिक घोषणा की।
कायस्थ समाज के प्रतिनिधित्व हेतु अखिल भारतीय कायस्थ महासभा को आमंत्रित किया गया, जिसमें महासभा के संरक्षक वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट धीरेंद्र प्रताप श्रीवास्तव, डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव (IRS), राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रिगेडियर अनिल श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। देश के लगभग सभी प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की उपस्थिति में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस बैठक को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना दिया। बैठक में यूजीसी एक्ट 2026, आरक्षण व्यवस्था, एससी-एसटी एक्ट, एससी/ओबीसी/माइनॉरिटी कमीशन तथा सवर्ण समाज की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर गंभीर और भावनात्मक चर्चा हुई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नया यूजीसी एक्ट देश की एकता और सामाजिक समरसता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, क्योंकि इससे जातियों के बीच विभाजन और मनमुटाव को बढ़ावा मिलेगा। प्रतिनिधियों ने चेताया कि यदि शिक्षा के मंदिर राजनीति और भेदभाव के अखाड़े बन गए, तो यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का पतन होगा। बैठक में यह भी कहा गया कि यह प्रावधान “हिंदू को हिंदू से लड़ाने” की एक सोची-समझी साजिश है, जो हिंदुत्व और सनातन मूल्यों के लिए गहरा आघात सिद्ध हो सकती है। संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए समिति ने स्पष्ट कहा कि कानून के समक्ष समानता प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसके विपरीत किसी भी प्रकार की असमानता संवैधानिक भावना के खिलाफ है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने अगले एक माह के भीतर यूजीसी एक्ट 2026 को वापस नहीं लिया, तो 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में “यूजीसी एक्ट रोलबैक महाआंदोलन” आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक देशभर के सवर्ण समाज की ऐतिहासिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही 1 फरवरी को प्रस्तावित भारत बंद को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा भी की गई। समन्वय समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजीसी एक्ट के अलावा सवर्ण समाज की अन्य दीर्घकालिक समस्याओं के स्थायी समाधान हेतु यह मंच निरंतर सक्रिय रहेगा। यह बैठक केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सवर्ण समाज की सामूहिक चेतना, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए उठी एक निर्णायक हुंकार बनकर उभरी जिसकी गूंज आने वाले दिनों में देश की राजनीति और नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Comments