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शनिवार, 31 जनवरी 2026

ब्रेन वेव्स 2026 में जीवन रचता दिखा, गोल्डन ऑवर की हर धड़कन में पीजीआईएमईआर सशस्त्र बलों का समर्पित संकल्प

ब्रेन वेव्स 2026 में जीवन रचता दिखा, गोल्डन ऑवर की हर धड़कन में पीजीआईएमईआर सशस्त्र बलों का समर्पित संकल्प

ब्रेन वेव्स–2026 : राष्ट्रीय न्यूरो-क्रिटिकल केयर शिखर सम्मेलन में आपातकालीन तंत्रिका चिकित्सा को सशक्त बनाने हेतु पीजीआईएमईआर सशस्त्र बलों के मजबूत सहयोग को रेखांकित किया गया

 16 एम्स संस्थानों, सशस्त्र बलों एवं नागरिक सेवाओं से 300 प्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

“पीजीआईएमईआर सशस्त्र बलों का सहयोग संस्थागत नैदानिक उत्कृष्टता और सैन्य चिकित्सा अनुशासन का सशक्त संगम है” : प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

पीजीआईएमईआर में आज आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय न्यूरो-क्रिटिकल केयर शिखर सम्मेलन ब्रेन वेव्स–2026 के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि सशस्त्र बलों ने अनुशासन, नवाचार और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणालियों के माध्यम से क्रिटिकल केयर चिकित्सा को उल्लेखनीय रूप से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग संस्थागत नैदानिक उत्कृष्टता और सैन्य चिकित्सा अनुशासन का एक सशक्त संगम प्रस्तुत करता है।
निदेशक महोदय ने आगे कहा कि न्यूरो-क्रिटिकल आपात स्थितियों में सटीकता, गति और समन्वित टीमवर्क अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सेना चिकित्सा सेवाओं के साथ सहयोग से न्यूरो-क्रिटिकल केयर सेवाओं को मजबूती मिल रही है, जहाँ ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान हर एक सेकंड जीवन और स्थायी विकलांगता के बीच अंतर तय कर सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रेन वेव्स–2026 जैसे मंच हमें श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने, संयुक्त नवाचार करने तथा नागरिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों के लिए एक सुदृढ़ आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
पीजीआईएमईआर द्वारा सोसाइटी फॉर इमरजेंसी, ट्रॉमा एंड डिजास्टर (SETD) एवं सोसाइटी फॉर क्रिटिकल केयर नर्सिंग (SCCN) के सहयोग से, साथ ही स्ट्रोक सर्विसेज और न्यूरोलॉजी विभाग, पीजीआईएमईआर तथा भारत सरकार की भीष्म परियोजना (BHISHM Project) के अकादमिक साझेदारी में आयोजित इस सम्मेलन में लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें देशभर के 16 एम्स संस्थानों, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, पुलिस सेवाओं तथा हरियाणा सरकार के प्रतिनिधि शामिल रहे। सम्मेलन की मुख्य थीम “गोल्डन ऑवर एंड बियॉन्ड: न्यूरो आपात स्थितियों में समय के विरुद्ध दौड़” रही, जो स्ट्रोक, न्यूरोट्रॉमा एवं अन्य समय-संवेदी तंत्रिका रोगों में त्वरित, साक्ष्य-आधारित और समन्वित हस्तक्षेप की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करती है। अकादमिक कार्यक्रम में पीजीआईएमईआर एवं अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के वरिष्ठ संकाय सदस्यों द्वारा विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। प्रमुख चर्चाएँ गोल्डन ऑवर प्रबंधन, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियाँ तथा स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और नागरिक प्रशासन में तैयारियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित रहीं। प्रमुख वक्ताओं में प्रो. धीरज खुराना, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, पीजीआईएमईआर; मेजर जनरल हरकीरत सिंह, कमांड अस्पताल; डॉ. नवदीप, सलाहकार, सड़क सुरक्षा, पंजाब सरकार; डॉ. रमन शर्मा, अस्पताल प्रशासन, पीजीआईएमईआर सहित देशभर के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल रहे। सत्रों में नैदानिक प्रोटोकॉल, प्रणालीगत चुनौतियों और व्यावहारिक समाधानों पर व्यापक चर्चा की गई।

सशस्त्र बलों के चिकित्सा नवाचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया में योगदान को रेखांकित करते हुए मेजर जनरल हरकीरत सिंह, कमांड अस्पताल ने कहा कि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं ने निरंतर नवाचार, प्रशिक्षण और त्वरित प्रतिक्रिया के माध्यम से क्रिटिकल केयर चिकित्सा को सशक्त बनाया है। पीजीआईएमईआर जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग से जटिल न्यूरो-आपात स्थितियों के प्रबंधन की हमारी सामूहिक क्षमता सुदृढ़ होती है, जिससे युद्धक्षेत्र और नागरिक दोनों परिदृश्यों में राष्ट्र को लाभ मिलता है। अस्पताल से बाहर की आपातकालीन समन्वित प्रतिक्रिया के महत्व पर बल देते हुए डॉ. नवदीप, सलाहकार, सड़क सुरक्षा, पंजाब ने कहा कि गोल्डन ऑवर के दौरान न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियों का प्रभावी प्रबंधन कानून प्रवर्तन एजेंसियों, आपात सेवाओं और चिकित्सा संस्थानों के बीच निर्बाध समन्वय पर निर्भर करता है। समयबद्ध प्रतिक्रिया, त्वरित मरीज निकासी और पीजीआईएमईआर जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग से जीवन रक्षा और न्यूरोलॉजिकल परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। ब्रेन वेव्स–2026 जैसे आयोजन इस समन्वित दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं और प्रणालीगत तैयारियों को सुदृढ़ बनाते हैं। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण तीन उन्नत, व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशालाएँ रहीं, जिनका उद्देश्य अकादमिक ज्ञान को वास्तविक समय की नैदानिक कार्यवाही में रूपांतरित करना था। आईवी थ्रोम्बोलाइसिस पर आधारित स्ट्रोक सिमुलेशन कार्यशाला में प्रतिभागियों को तीव्र मूल्यांकन, प्रोटोकॉल आधारित निर्णय-निर्माण और समयबद्ध हस्तक्षेप की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। ट्रॉमा एवं न्यूरो-सर्जिकल कार्यशाला में आपातकालीन न्यूरोसर्जिकल प्रतिक्रिया, दबाव में निर्णय-निर्माण, ट्रॉमा टीमों और ऑपरेशन इकाइयों के बीच समन्वय तथा गोल्डन ऑवर के दौरान स्थिरीकरण प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही बाल एवं नवजात क्रिटिकल केयर कार्यशाला में बच्चों और नवजात शिशुओं में तंत्रिका आपात स्थितियों के प्रबंधन से जुड़ी विशिष्ट चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई। इन सभी कार्यशालाओं में उन्नत सिमुलेशन तकनीक, आधुनिक प्रशिक्षण उपकरणों और साक्ष्य-आधारित प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया, जिससे प्रतिभागियों की व्यावहारिक दक्षता, अंतःविषय समन्वय और नैदानिक आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। अकादमिक गुणवत्ता, नैदानिक प्रासंगिकता और सहयोगात्मक भावना के लिए व्यापक रूप से सराहे गए ब्रेन वेव्स 2026 का समापन उच्च उत्साह के साथ हुआ। इस सम्मेलन ने न्यूरो-क्रिटिकल केयर शिक्षा में पीजीआईएमईआर के नेतृत्व और सशस्त्र बलों के साथ उसके दीर्घकालिक सहयोग को पुनः सुदृढ़ किया। सम्मेलन ने नागरिक और सैन्य स्वास्थ्य प्रणालियों की उस साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया, जिसका उद्देश्य जीवन रक्षा, विकलांगता में कमी और सबसे संकटपूर्ण क्षणों में समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करना है।

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