🔘 गणतंत्र दिवस पर प्राथमिक विद्यालय मुगलीपुर ने जगाई राष्ट्र चेतना
लखीमपुर खीरी। प्राथमिक विद्यालय मुगलीपुर, विकास क्षेत्र बेहजम में 77वाँ गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, संस्कार और संविधान के प्रति श्रद्धा का जीवंत उत्सव बनकर उभरा।
विद्यालय परिसर देशभक्ति के गगनभेदी नारों, तिरंगे की शान और नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों के उत्साहपूर्ण उल्लास से गूंज उठा। हर चेहरा गर्व से दमक रहा था और हर प्रस्तुति में भारत माता के प्रति समर्पण झलक रहा था।
इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान ब्रज किशोर गुप्ता एवं प्रीतेश पांडे रहे।
वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में दैनिक जनजागरण न्यूज के संपादक अनिल श्रीवास्तव तथा कविशु संदेश के संपादक चंद्रशेखर शुक्ला की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और गरिमा को और भी बढ़ा दिया। विद्यालय परिवार द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। जैसे ही तिरंगा आकाश की ओर लहराया, वातावरण “जय हिंद” और “वंदे मातरम्” के उद्घोष से भर उठा। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीतों, ओजपूर्ण कविताओं, मनोहारी नृत्यों और भावप्रवण नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की एकता, अखंडता और संविधान की महत्ता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
बच्चों की निष्कलुष भावनाओं से सजी प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर इंचार्ज प्रधानाध्यापक अनुराधा तिवारी ने गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारे कर्तव्यों और अधिकारों की जीवंत आत्मा है। उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और एक जिम्मेदार, सजग नागरिक बनने का आह्वान किया। अतिथियों एवं वक्ताओं ने अपने संबोधन में बच्चों की प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में देशप्रेम, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने विद्यालय परिवार को इस प्रेरणादायी आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यापिकाएँ प्रियंका द्विवेदी एवं आरती सिंह का विशेष योगदान उल्लेखनीय रहा। अंततः राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ, परंतु राष्ट्रभक्ति की जो अलख इस आयोजन ने जगाई, वह उपस्थित सभी के हृदय में देर तक गूंजती रही।
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