आने वाले महीनों में 'शांति' अधिनियम के नियम अधिसूचित होने की उम्मीद, निजी क्षेत्र के हित प्रबल: डॉ. जितेंद्र सिंह
भारत के लिए परमाणु ऊर्जा अब कोई विकल्प नहीं बल्कि एक ज़रूरत है: डॉ. जितेंद्र सिंह
चंडीगढ़ डॉ रमेश देहराज मुख्य सम्पादक (चीफ़ एडिटर) उजाला आज तक
नई दिल्ली, 25 जनवरी: विज्ञान और टेक्नोलॉजी, पृथ्वी विज्ञान परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन और प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि 'शांति' अधिनियम (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया एक्ट, 2025) के तहत नियमों को आने वाले कुछ महीनों में अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है।
मंत्री महोदय ने कहा कि नियम बनाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकार बहुत सावधानी से आगे बढ़ रही है क्योंकि शांति अधिनियम भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा बदलाव लाएगा जिससे इस क्षेत्र में निजी और गैर-सरकारी भागीदारी के लिए रास्ते खोले जा सकेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नया ढांचा ऐसा होना चाहिए जो सहयोग और विकास को बढ़ावा दे, साथ ही भारत के पुराने और कड़े सुरक्षा, संरक्षा और नियामक मानकों को पूरी तरह सुरक्षित रखे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शांति अधिनियम को लेकर निजी क्षेत्र के साथ साथ विदेशी हितधारकों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है, जो भारत की परमाणु ऊर्जा योजनाओं में गहरी वैश्विक रुचि को दर्शाती है। उन्होंने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों ने भी इस नए कानून में गहरी दिलचस्पी दिखाई है, जो स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा विस्तार के लिए भारत के नज़रिए में उनके विश्वास को दिखाता है।
मंत्री महोदय ने नियामक और सुरक्षा पहलुओं पर जोर दिया और कहा कि शांति अधिनियम इसे कमज़ोर करने के बजाय निगरानी को मज़बूत करता है, जिसमें लाइसेंसिंग, सुरक्षाअधिकरण और जवाबदेही के स्पष्ट प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि रणनीतिक सामग्री और परमाणु ईंधन चक्र के संवेदनशील हिस्से सख्त सरकारी नियंत्रण में रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता न हो, भले ही इस क्षेत्र में नए भागीदार आएं।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से जुड़े सवालों पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार मौजूदा एफडीआई फ्रेमवर्क के आधार पर ही काम करेगी, साथ ही इस बात की भी समीक्षा की जाएगी कि परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को सहारा देने के लिए कुछ अतिरिक्त स्पष्टता या विशिष्ट नियमों की आवश्यकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि कोई भी बदलाव बहुत सोच-समझकर किया जाएगा और वह स्थापित नीतिगत सिद्धांतों के अनुरूप ही होगा।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि परमाणु ऊर्जा में शुरुआत में अधिक लागत आती है, विशेष रूप से 'लाइट वॉटर रिएक्टर्स' के मामले में जो आयातित उपकरणों पर निर्भर होते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे क्षमता बढ़ेगी और घरेलू स्तर पर निर्माण कार्य में तेजी आएगी, लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए परमाणु ऊर्जा अब एक जरूरत बन गई है, क्योंकि देश स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना चाहता है, और चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है, जिसे केवल नवीकरणीय स्रोतों से हमेशा सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण में परमाणु ऊर्जा क्षमता का बड़े पैमाने पर विस्तार शामिल है, ताकि भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और उद्योग, स्वास्थ्य सेवा व डेटा अवसंरचना जैसे क्षेत्रों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि शांति अधिनियम को एक ऐसा तंत्र बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो जिम्मेदारी के साथ निवेश और तकनीकी विकास को बढ़ावा दे, साथ ही विकास के साथ-साथ सुरक्षा, जवाबदेही और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखे।
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