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रविवार, 11 जनवरी 2026

Greater Noida. क्लासरूम से कॉरपोरेट तक मैनेजमेंट छात्रों के पुनर्मिलन 2.0 में सजी सफलता की कहानी

🔘 क्लासरूम से कॉरपोरेट तक मैनेजमेंट छात्रों के पुनर्मिलन 2.0 में सजी सफलता की कहानी

नोएडा। ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ बिज़नेस एंड एडमिनिस्ट्रेशन के सत्र 2008-10 के मैनेजमेंट छात्रों ने वर्षों बाद जब एक-दूसरे से मिलने का संकल्प लिया, तो वह केवल मिलन नहीं रहा, वह बन गया पुनर्मिलन 2.0, स्मृतियों, सम्मान और सफलता की जीवंत कहानी।

नोएडा के ज़ेबो फ़ार्म की खुली हरियाली में आयोजित इस आयोजन ने उस दौर की कक्षाओं, प्रेज़ेंटेशनों और सपनों को फिर से जीवंत कर दिया, जहाँ कभी भविष्य की नींव रखी गई थी। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ संस्थान की वह फैकल्टी भी उपस्थित रही, जिनके मार्गदर्शन ने इन युवाओं को जीवन के व्यावसायिक और मानवीय मूल्यों से परिचित कराया। कॉलेज के डीन डॉ. वी.एन. राय सहित डॉ. विकास सक्सेना, डॉ. ललित शर्मा, डॉ. राशिद, डॉ. देवऋषि, डॉ. नमिता, डॉ. अर्पिता, सीए आरती, संदीप अग्रवाल, डॉ. हरि श्याम, डॉ. कविता, डॉ. शेफाली, डॉ. मीनाक्षी और डॉ. अजय की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊँचाई दी। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई जहाँ विदिशा और रोली की सधी हुई संचालन शैली ने वातावरण को आत्मीयता से भर दिया। फैकल्टी सदस्यों का मणिपुरी शॉल और स्मृति-चिन्हों से सम्मान किया गया, जो गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान का सजीव प्रतीक बना। इसके बाद मंच बना अनुभवों का, पिछले 15 वर्षों की जीवन-यात्रा साझा करते हुए स्वरोज़गार के क्षेत्र में आगे बढ़े अवनीश, राजेश, सुजीत, हैरी और वीरेंद्र ने आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानियाँ सुनाईं, वहीं कॉरपोरेट और सेवा क्षेत्र में कार्यरत अखिलेश, राम, विकास, अरुण प्रवीण, सीमंता, प्रभाकर, निकिता, गरिमा, रवींद्र, अन्नपूर्णा, रवि रंजन, गिरिराज, प्रशांत, मंगल और शिवेंद्र ने फैकल्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपने सफ़र को साझा किया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण रहा देश के विभिन्न कोनों से आए पूर्व छात्र गुवाहाटी से सीमंता, पटना से वीरेंद्र, दरभंगा से हिमांशु, प्रतापगढ़ से विष्णु, रांची से प्रभाकर, गाज़ीपुर से राजेश और मैरवा से सुजीत जिनकी उपस्थिति ने पुनर्मिलन को राष्ट्रीय स्वरूप दे दिया। पुनर्मिलन 2.0 केवल अतीत की स्मृतियों का उत्सव नहीं था, बल्कि यह उस विश्वास की पुष्टि थी कि सही शिक्षा, समर्पित गुरु और दृढ़ संकल्प समय की दूरी को भी पीछे छोड़ देते हैं। उक्त जानकारी विशाल श्रीवास्तव द्वारा एक विज्ञप्ति में दी गई।

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