🔘 लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड की डोर से बंधे दिल, जहाँ सम्मान बना संस्कार और संवेदना ने रचा उत्सव
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान। सिधौली की सांझ उस दिन साधारण नहीं थी। वह सांझ रिश्तों की रोशनी से जगमग थी, जहाँ परिचय नहीं पर अपनापन था, नाम नहीं पर आत्मीयता थी। लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड के “परपंचु” पटल ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि लोकभाषा की बतकही से उपजा संवाद कब सजीव संवेदना बन जाता है, पता ही नहीं चलता।
गोण्डा से नैमिषारण्य की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं का सिधौली में हुआ स्वागत मात्र औपचारिक नहीं था, बल्कि भारतीय अतिथि संस्कार की जीवंत झांकी था। नगर पंचायत सिधौली की समाजसेवी शालिनी सिंह भदौरिया ने अंतरराष्ट्रीय लोकगायक शिव पूजन शुक्ला के नेतृत्व में आए लगभग 40 श्रद्धालुओं को माल्यार्पण, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और आत्मीय जलपान के साथ सम्मानित कर मानवीय मूल्यों को नई ऊँचाई दी। भाव विभोर शिव पूजन शुक्ला ने इसे अकल्पनीय अपनत्व बताया, तो शालिनी ने इसे परपंचु के सौजन्य से मिला सौभाग्य। यह घटना सिर्फ स्वागत की नहीं, बल्कि उस सेतु की है जो डिजिटल संवाद से निकलकर धरातल पर रिश्तों का उत्सव रच देता है जहाँ भाषा लोक की होती है और भाव लोक से भी आगे।
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