🔘 अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ ने वित्त मंत्री से की ठोस आर्थिक प्रावधानों की मांग
नई दिल्ली। भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुप्रसिद्ध योग गुरु मंगेश त्रिवेदी ने कल नई दिल्ली में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से शिष्टाचार भेंट कर आगामी केंद्रीय बजट 2026, 27 में योग शिक्षकों के लिए ठोस आर्थिक प्रावधानों की मांग रखी।
इस अवसर पर सौंपे गए ज्ञापन में योग गुरु मंगेश त्रिवेदी ने अत्यंत संवेदनशील और दूरदर्शी विज़न प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि भारत को वास्तव में “Global Wellness Hub” के रूप में स्थापित करना है, तो योग शिक्षकों को केवल साधक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त वेलनेस उद्यमी बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देशभर में लाखों योग शिक्षक योग को जीवन साधना के साथ-साथ आजीविका का माध्यम बनाना चाहते हैं, किंतु पूंजी, ऋण और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में उनके सपने सीमित रह जाते हैं। महासंघ की प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं योग शिक्षकों को स्वरोजगार के लिए योग केंद्र (Yoga Studios) खोलने हेतु ब्याज-मुक्त अथवा न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था, योग आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सब्सिडी, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में योग शिक्षकों को विशेष प्राथमिकता, योग उपकरणों, ऑनलाइन योग कक्षाओं एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर GST में रियायत।
योग गुरु मंगेश त्रिवेदी ने कहा कि जब योग शिक्षक आत्मनिर्भर होगा, तभी वह समाज को स्वस्थ रखने के अपने दायित्व को और अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकेगा। उनका मानना है “जब देश का योग शिक्षक ‘वेलनेस उद्यमी’ बनेगा, तभी ‘स्वस्थ भारत आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प साकार होगा।” भेंट के दौरान वित्त राज्य मंत्री श्री चौधरी ने महासंघ के सुझावों को गंभीरता से सुना और योग के सामाजिक, आर्थिक व वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। इस संवाद ने योग समुदाय में नई आशा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। महासंघ को पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आगामी बजट में योग गुरुओं एवं शिक्षकों की इन न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और योग को केवल साधना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का सशक्त स्तंभ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लेगी। यह पहल न केवल योग शिक्षकों के जीवन में स्थायित्व लाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, संतुलन और समरसता का केंद्र बनाने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments