🔘 कैरिओके सिंगर्स की पहली समग्र डाइरेक्टरी के विमोचन के साथ सुरों की पहचान को मिला नया मंच
गुरुग्राम। संगीत जब साधना बन जाए और साधना सामाजिक आंदोलन का रूप ले ले, तब इतिहास रचता है। कुछ ऐसा ही नजारा गुरुग्राम के प्रतिष्ठित आर्टिमिस ऑडिटोरियम में देखने को मिला, जहाँ लेखक पवन शर्मा की पहली कैरिओके सिंगर्स डाइरेक्टरी का भव्य एवं गरिमामय विमोचन संपन्न हुआ। यह डाइरेक्टरी न केवल एक पुस्तक है, बल्कि कैरिओके गायन से जुड़े हजारों सुरों को एक साझा पहचान देने का सशक्त प्रयास है।
इस अनूठे प्रकाशन में गुरुग्राम, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद एवं फरीदाबाद क्षेत्र के कैरिओके सिंगर्स, ऑर्गनाइजर्स, ऑडिटोरियम और स्टूडियो से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों का सुव्यवस्थित संकलन किया गया है, जो संगीत-जगत के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। समारोह की गरिमा को विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने और ऊँचाई प्रदान की।
मल्हार संगीत कला केंद्र की संस्थापक परमिंदर चड्डा, ग्लोबल कल्चरल फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष कर्नल आर.सी. चड्डा, नवरत्न फाउंडेशंस के अध्यक्ष डॉ. अशोक श्रीवास्तव तथा आर्टिमिस हॉस्पिटल के महाप्रबंधक फरीद खान ने अपने प्रेरक विचारों से आयोजन को सार्थक बनाया। इनके साथ एनसीआर के अनेक प्रतिष्ठित सिंगर्स एवं ऑर्गनाइजर्स की उपस्थिति ने सभागार को जीवंत ऊर्जा से भर दिया। खचाखच भरे ऑडिटोरियम में वक्ताओं ने कैरिओके सिंगिंग के सामाजिक, मानसिक एवं स्वास्थ्यगत महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गायन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की दिशा में एक सशक्त साधन है। यह तनाव, अवसाद और एकाकीपन जैसी आधुनिक जीवन की चुनौतियों से राहत देता है और व्यक्ति के आत्मविश्वास एवं सामाजिक जुड़ाव को सुदृढ़ करता है। अपने ओजस्वी संबोधन में लेखक पवन शर्मा ने कहा कि गायकी हमारी कला और संस्कृति की आत्मा है, जो आज एक सकारात्मक एवं उभरती हुई हॉबी के रूप में लाखों लोगों को जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि कैरिओके सिंगिंग का व्यवस्थित एवं व्यावसायिक स्वरूप न केवल प्रतिभाओं को मंच दे रहा है, बल्कि हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहा है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि इतने व्यापक क्षेत्र के बावजूद अब तक कोई समग्र डाइरेक्टरी उपलब्ध नहीं थी यह प्रयास उसी कमी को पूर्ण करने की दिशा में एक विनम्र पहल है। समारोह के दौरान प्रस्तुत कैरिओके गीतों ने वातावरण को सुरों से सराबोर कर दिया और श्रोताओं की तालियों ने कलाकारों का उत्साह दोगुना कर दिया। उपस्थित अतिथियों, सिंगर्स, ऑर्गनाइजर्स और दर्शकों ने इस अभिनव प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में पवन शर्मा ने बताया कि संगीत-प्रेमियों से मिले उत्साहजनक प्रतिसाद के आधार पर शीघ्र ही इस डाइरेक्टरी का द्वितीय संस्करण प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें और अधिक कलाकारों, आयोजकों एवं आयोजन स्थलों को सम्मिलित कर इस सुर-यात्रा को और व्यापक बनाया जाएगा। यह डाइरेक्टरी केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि सुरों को सम्मान, पहचान और दिशा देने वाला एक प्रेरणादायी दस्तावेज बनकर उभरी है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments