🔘 सृजन महोत्सव 2025 के तृतीय सत्र राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में काव्य की ओजस्वी धार से गुंजायमान हुआ बिसवां
बिसवां (सीतापुर)। साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम भी है इसी भावभूमि पर साहित्य सृजन संस्थान, बिसवां (सीतापुर) द्वारा हरगोविंद वर्मा सभागार में आयोजित वार्षिक समारोह “सृजन महोत्सव 2025” के तृतीय सत्र में भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। काव्य, संस्कृति और संवेदना के इस विराट संगम ने श्रोताओं को वैचारिक ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत कर दिया।
मुख्य अतिथि अभिषेक (विभाग प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सीतापुर) ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि “कवि सम्मेलन हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते हैं। साहित्य समाज के अंतर्मन को स्वर देता है और व्यक्तित्व विकास में निर्णायक भूमिका निभाता है।” अध्यक्षीय उद्बोधन में हरीश बाजपेई (पूर्व विधान परिषद सदस्य, सीतापुर) ने कहा कि जब कविता जन-समस्याओं को स्वर देकर जन-सरोकारों से सीधा संवाद स्थापित करती है, तब वह सामाजिक चेतना की मशाल बन जाती है। सम्मानित अतिथियों के रूप में चंद्र कुमार मिश्र ‘बापू’ (अध्यक्ष, सहकारी जूट एवं कृषि विकास संघ), सुरेंद्र (जिला प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बिसवां), सुधाकर शुक्ला (अध्यक्ष, गन्ना समिति), रेनू मेहरोत्रा (वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता), आर. सी. सिंघल (मुख्य अधिशासी, दि सेक्सरिया शुगर फैक्ट्री), मीरा सिंघल (सोशल एक्टिविस्ट एवं सशक्त कलमकार) तथा संदीप मिश्रा ‘सरस’ (राष्ट्रीय अध्यक्ष, साहित्य सृजन संस्थान) मंचासीन रहे। कार्यक्रम कासम्मोहक संचालन लवकुश शुक्ल (युवा कवि, सिधौली) ने किया। अपूर्व त्रिवेदी की भावपूर्ण वाणी वंदना से सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
वीर रस के ओजस्वी कवि रजनीश मिश्र ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम पर केंद्रित काव्यपाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया “राम की पावन अयोध्या भाग्य पर इतरा रही है, विश्व की चारों दिशाओं में छटा छितरा रही है…”। दैनिक जागरण, सीतापुर के ब्यूरो चीफ जगदीप शुक्ल ‘अंचल’ ने राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय अस्मिता पर केंद्रित प्रभावी पंक्तियों से सभा को वैचारिक ऊँचाई प्रदान की “प्रगति पथ का भी सुनिश्चित एक क्रम हो…। राष्ट्रभाषा का करे जो मान-मर्दन, भेदने को दंभ उसका कठिन श्रम हो।” श्रृंगार रस के सशक्त हस्ताक्षर कार्तिकेय शुक्ल ने अपनी रचना “तुम अधर चूम लो, मैं नयन चूम लूं” से श्रोताओं का हृदय जीत लिया। छंदों के सिद्धहस्त साहित्यकार इंजीनियर अंबरीष श्रीवास्तव ‘अंबर’ ने कहा “सांख्ययोग से सीख ले कर्मयोग का मर्म…”। संवेदना के कवि संदीप मिश्रा ‘सरस’ ने मां के ममत्व को शब्द देते हुए भाव-विभोर कर दिया “नेह का रख-रखाव है अम्मा, भावना का चढ़ाव है अम्मा…”। लोकगीतों से मनोज अवस्थी ‘शुकदेव’, मुक्तकों से डॉ. मनोज दीक्षित, दोहों से अशोक मिश्र ने सम्मेलन की गरिमा बढ़ाई। मीरा सिंघल ने नारी सशक्तिकरण पर केंद्रित रचना से चेतना का संचार किया। आशीष शुक्ल (पैंदापुर, सीतापुर) की ओजस्वी वाणी, मनोज श्रीवास्तव ‘मधुर’ के शुभकामना मुक्तक विशेष रूप से सराहे गए। इसके अतिरिक्त डॉ. सतीश वर्मा, एस. पी. जायसवाल, तुषार मिश्र, यासीन इब्ने उमर, अरुण शर्मा ‘बेधड़क’, बैकुंठ सागर, अंबुज दीक्षित, राहुल भारती, कृष्ण मुरारी त्रिवेदी ‘खरोंच’, रजनीकांत दीक्षित, आनंद खत्री, घनश्याम शर्मा, मयंक मिश्र ‘सहर’, नैय्यर शकेब सहित अनेक रचनाकारों ने अपने सशक्त काव्यपाठ से कवि सम्मेलन को ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। संस्थान की ओर से समस्त रचनाकारों, पत्रकारों एवं आयोजक मंडल के सदस्यों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। वृंदारकनाथ मिश्र, विनय दीक्षित, कौशल वर्मा, उबैद बदर, सुनील रस्तोगी, नीरज मिश्र (सभासद), सदाशिव शुक्ल, अमित शर्मा, अंबर श्रीवास्तव, अनिक गुप्ता सहित सहयोगियों ने मंचस्थ अतिथियों का बैज-अलंकरण, माल्यार्पण एवं स्वागत किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अंत में कार्यक्रम संयोजक रजनीकांत दीक्षित, आनंद खत्री एवं घनश्याम शर्मा ने सभी अभ्यागतों के प्रति आभार व्यक्त किया, वहीं राजेंद्र तिवारी, मुकुंद पांडे, देवेंद्र शुक्ल, अनिमेष मानू एवं मनोज वर्मा ने वार्षिकोत्सव के अगले वर्ष तक स्थगन की घोषणा की। साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभाव से अनुप्राणित यह कवि सम्मेलन बिसवां की सांस्कृतिक चेतना में एक स्वर्णिम अध्याय बनकर अंकित हुआ।
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