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शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

प्रयागराज : प्रधान और लेखपाल की उदासीनता से उत्पन्न हुई पीड़ा, महिला के छुपे आंसू और असहाय बच्चों की कराह जिम्मेदार कौन?

प्रधान और लेखपाल की उदासीनता से उत्पन्न हुई पीड़ा: महिला के छुपे आंसू और असहाय बच्चों की कराह जिम्मेदार कौन?

प्रयागराज यमुनानगर तहसील बारा क्षेत्र के जसरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा भीटा में रहने वाली पूजा हरिजन की कहानी न केवल समाज के लिए चेतावनी है, बल्कि मानवता पर सवाल भी खड़ा करती है। कुछ दिन पहले मीडिया में खबर आई थी कि बरसात के दौरान उसका मकान पूरी तरह ढह गया। लेकिन इसके बावजूद ग्राम प्रधान और लेखपाल ने केवल औपचारिकता के लिए फोटो खींचा और वहाँ से चले गए। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आज, दो महीने बाद भी यह गरीब महिला अपने छोटे बच्चों के साथ जंगल से लकड़ी काटकर बनाए गए अस्थायी आश्रय में जीने को मजबूर है। बरसात के पानी में उनका आश्रय बार-बार भर जाता है। महिला ने अपने मोबाइल से बनाए गए वीडियो में अपने छुपे आंसू और पीड़ा साझा की। वीडियो में उसकी आवाज़ कांप रही है, बच्चे रो रहे हैं और महिला बार-बार कहती हैं,भैया, हमारे बच्चों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है, बरसात में पूरा घर भर जाता है, हम क्या करें?”महिला का कहना है कि प्रधान उसकी बात इसलिए नहीं सुन रहे क्योंकि वह हरिजन वर्ग से आती हैं। वीडियो में महिला यह भी पूछती हैं कि क्या ग्राम प्रधान और लेखपाल का यही कर्तव्य है कि असहाय लोगों की पीड़ा अनसुनी रहे? स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि महिला के मकान की हालत लगातार खराब हो रही है, बच्चे भीग रहे हैं और महिला के पास अपने बच्चों को सुरक्षित रखने का कोई साधन नहीं है। बैंक में मदद का पैसा पहुँचने की बात कही गई थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद एक भी रुपए की मदद महिला को नहीं मिली।ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान और लेखपाल की यह उदासीनता न केवल महिला की जिंदगी को संकट में डाल रही है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जीवन को भी खतरे में डाल रही है। इस मामले की जांच यदि जिलाधिकारी प्रयागराज मनीष वर्मा द्वारा की जाए, तो शायद ग्राम प्रधान और लेखपाल की पूरी लापरवाही सामने आए। इस गरीब महिला और उसके बच्चों को सरकारी छत्रछाया और राहत मिलने की अब सबसे ज्यादा जरूरत है। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या ग्राम प्रधान और स्थानीय अधिकारी का यही कर्तव्य है कि असहायों की पीड़ा को अनसुना कर दें, या उन्हें मानवता और न्याय के दृष्टिकोण से तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। छोटे बच्चों की बेसहारी, महिला की पीड़ा और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का है, क्या देश और प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की एक झलक भीटा ग्राम सभा की गरीब महिला का माना जायें।

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