दलीपराय पट्टी में भगवाधारी जोगी के भेष में भिक्षा मांग रहा संदिग्ध मुस्लिम युवक धराया, पूछताछ के लिए आई इंटेलिजेंस ब्यूरो की टीम
सादात थानाक्षेत्र के दलीपराय पट्टी गांव में ग्रामीणों ने भगवाधारी जोगी के भेष में भिक्षा मांगते हुए एक युवक की संदिग्ध हरकतें देख उसे पकड़ लिया। इसके बाद उससे पूछताछ करने लगे। उसके पास से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान मुस्लिम व्यक्ति के रूप में हुई। जिसके बाद उनकी सूचना पर पहुंची पुलिस संदिग्ध को पकड़कर थाने ले गई। वहीं मामला अधिक संदिग्ध जानकर इंटेलिजेंस ब्यूरो की टीम भी पूछताछ करने के लिए आ धमकी और थाने में संदिग्ध से पूछताछ की जा रही है। वहीं ग्रामीणों द्वारा सख्ती से पूछताछ में उसने ये भी खुलासा किया कि उसके साथ 8 अन्य मुस्लिम युवक भी क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में भिक्षा मांग रहे हैं। मंगलवार की रात 10 बजे गांव में भगवा पहनकर एक संदिग्ध युवक घूमकर भिक्षा मांग रहा था। उसके तौर तरीकों से ग्रामीणों को वो कुछ संदिग्ध लगा तो लोगों ने उसे पकड़कर पूछताछ की। जिसके बाद वो भागने लगा। इसके बाद ग्रामीण रितेश विश्वकर्मा, रंजन यादव, रंजीत यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने उसे पंचईपट्टी गांव के राजभर बस्ती तक दौड़ाकर उसे पकड़ लिया। इसके बाद ग्रामीणों व जिपं सदस्य मारकंडेय सिंह ने उससे सख्ती से पूछताछ करते हुए उसके झोले की तलाशी ली गई तो उसके पास से मिले आधार कार्ड व बैंक पासबुक से उसकी पहचान मऊ के नवापुरा खालसा निवासी सोहराब पुत्र फूलबदन के रूप में हुई। जिसके बाद उसने कथित रूप से खुद को छोड़ने के बदले 1 लाख रूपए देने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों ने लालच न कर पुलिस को सूचना दे दी तो मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे पकड़ा और लेकर थाने आई। इसके बाद उससे पूछताछ की गई। इस बाबत एसओ वागीश विक्रम सिंह ने बताया कि संदिग्ध से पूछताछ जारी है। आईबी के अधिकारी भी थाने पहुंचकर पूछताछ में जुट गए हैं। उधर पूछताछ में सोहराब ने बताया कि उसके साथ आठ अन्य मुस्लिम युवक भी जोगी के भेष में अलग-अलग जगहों पर घूमते हैं। बुधवार को सोहराब के घर से अरशद उर्फ मुन्ना और नवापुरा खालसा के पूर्व प्रधान के पुत्र भोला सिंह व सत्यप्रकाश सिंह भी थाने पहुंचे, जहां उन्होंने बताया कि नवापुरा खालसा मूल रूप से आजमगढ़ जिले में है। यहां ठाकुर समुदाय के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। इस बस्ती के अधिकांश मुस्लिम लोग जोगी का भेष बनाकर भिक्षाटन करते हैं। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि पकड़े जाने के बाद नकली जोगी ने खुद को छोड़ने के बदले तत्काल 1 लाख रूपए देने की भी पेशकश की। ऐसा सुनकर तो ग्रामीणों का संदेह और पुख्ता हो गया और संभवतः इसी वजह से इंटेलिजेंस ब्यूरो को भी इसमें शामिल होना पड़ा। हालांकि एसओ ने उसके पास 1 लाख रूपए होने की संभावना से इंकार किया है।
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