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रविवार, 17 अगस्त 2025

कलयुगी संबंधों का दर्दनाक चेहरा : पत्नी ने मृत बच्ची को जन्म दिया, पति ने ठुकराया, 12 घंटे पड़ा रहा मासूम का शव

कलयुगी संबंधों का दर्दनाक चेहरा : पत्नी ने मृत बच्ची को जन्म दिया, पति ने ठुकराया, 12 घंटे पड़ा रहा मासूम का शव

सैदपुर। कभी-कभी रिश्तों की कलुषित परछाइयाँ इतनी गहरी हो जाती हैं कि मानवीय संवेदनाएँ भी लज्जित हो उठती हैं। सैदपुर नगर के महिला अस्पताल में गुरुवार की रात ऐसा ही हृदय विदारक दृश्य सामने आया, जब एक प्रसूता ने मृत बच्ची को जन्म दिया और उसके पति ने उसे अपनी संतान मानने से इंकार कर दिया।
दोपहर में आरती देवी ने प्रसव पीड़ा के बाद एक मृत शिशु को जन्म दिया। मायके पक्ष शोक में डूबा था, परंतु रात होते ही वहाँ पहुँचे पति धनंजय ने बच्ची को अपना मानने से इंकार करते हुए डीएनए टेस्ट की ज़िद थाम ली। इस हठ ने अस्पताल परिसर को आँसुओं और आक्रोश से भर दिया। दुःख की घड़ी में भी आरोप-प्रत्यारोप की तलवारें चलीं और मृत मासूम का शव 12 घंटे तक अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में पड़ा रहा।
पुलिस व स्थानीय लोगों ने समझाने का प्रयास किया, किंतु कलयुगी पति अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। अंततः आधी रात में पुलिस ने शव को मर्चरी भेजकर स्थिति संभाली। आरती देवी की शादी दो वर्ष पूर्व हुई थी, लेकिन वैवाहिक रिश्ते जल्द ही कटुता में बदल गए। पति ने तलाक का मुकदमा डाल दिया और गर्भवती पत्नी को मायके भेज दिया। और अब, जब माँ की कोख से निकला मासूम मृत अवस्था में था, तब भी संवेदनाएँ रिश्तों से हार गईं। गर्मी की तपन में तड़पते हुए 12 घंटे तक पड़ी रही नवजात की नन्ही देह, और लोग केवल यह सोचते रहे कि आखिर यह कैसी संतान और कैसा पिता जिसने मौत के बाद भी मासूम को स्वीकारने से इंकार कर दिया।
स्थानीय लोग इस घटना पर स्तब्ध हैं और कह रहे हैं जहाँ रिश्ते विश्वास की डोर से टूटते हैं, वहाँ इंसानियत भी शून्य हो जाती है।
कुलमिलाकर यह घटना समाज को सोचने पर विवश करती है कि क्या रिश्ते केवल कागज़ी दस्तावेज़ों तक सीमित हो चुके हैं?  क्या स्नेह, करुणा और जिम्मेदारी अब बेमानी हो गई है? सच्चाई यह है कि मृत बच्ची अब किसी का प्रमाण नहीं माँगती, बल्कि जीवित समाज से यह सवाल पूछती है कि क्या इंसानियत भी मर चुकी है?

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