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रविवार, 8 जनवरी 2023

विचार प्रवाह / संविधान का परिचय : धर्मवीर गुप्ता

           संविधान का परिचय : धर्मवीर गुप्ता

      (कक्षा का दृश्य अध्यापक तथा बच्चे बैठे हैं।)
अध्यापक:- बच्चों आज गणतन्त्र दिवस है। आज के दिन हमारे  देश का संविधान लागू हुआ था।
रामू:- गुरुजी, संविधान क्या है ?
अध्यापक:- संविधान वह पुस्तक है जिसके अनुसार पूरे देश की शासन प्रणाली क्रियान्वित होती है ?
रामू:-   पूरे देश की! (आश्चर्य से)
अध्यापक:- हां! पूरे देश की।
रामू:-   तब तो यह बहुत विशाल होगा?
अध्यापक:- हां! अन्य देशों की  अपेक्षा हमारे देश का संविधान विशाल है।
रामू:-    तब तो संविधान में ही सभी नियम कानून होंगे ?
अध्यापक:- नहीं, संविधान तो मार्गदर्शक की तरह है जो सरकार के प्रमुख अंगों, उनके कार्यक्षेत्रों एवं                          नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करता है तथा उनकी सीमाएं भी निर्धारित करता  है। संविधान द्वारा दिखाए गए मार्ग के अनुरूप ही अन्य नियम  व कानून बनाए जाते हैं जैसे दहेज निषेध, सूचना अधिकार अधिनियम आदि।
महेश:-    गुरु जी! तब तो इसे लिखने में भी अधिक समय लगा होगा?
अध्यापक:-  हां! संविधान को लिखने में 2 वर्ष 11 माह तथा 18 दिन लगे थे तथा 63 लाख 96 हजार रूपए खर्च हुए थे।
रोहन:-     गुरु जी! क्या एक आदमी इतना विशाल संविधान लिख सकता है?
अध्यापक:-  (सोचते हुए) हां, ...... लिख तो सकता है किन्तु भाई हमारे देश के संविधान को किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिखा है ?
रोहन:-     तो फिर क्या कई .....
अध्यापक:-   हां! हमारे देश के संविधान के निर्माण के लिए 389 सदस्यों वाली संविधान सभा का गठन किया गया परन्तु बँटवारे के बाद कुल सदस्यों में से भारत में 299 ही रह गए। जिनमे 296 चुने हुए थे। वहीं 70 मनोनीत थे। जिनमें कुल महिला सदस्यों की संख्या 15 , अनुसूचित जाति के 26, अनुसूचित जनजाति के 33 सदस्य थे। जिसका प्रथम अस्थायी अध्यक्ष डाॅ0 सच्चिदानंद तथा स्थायी अध्यक्ष डाॅ राजेन्द्र प्रसाद  जी को बनाया गया तथा बी0 एन0 राव को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया। संविधान सभा ने कई समितियों का गठन किया। उन समितियों में प्रारुप समिति प्रमुख समिति थी और इस प्रमुख समिति के अध्यक्ष डाॅ भीमराव अम्बेडकर थे। इसलिए इन्हें संविधान का निर्माता कहा जाता है।
महेश:-      तब तो इन लोगों ने अध्ययन भी खूब किया होगा ?
अध्यापक:-   हां! इन्होंने खूब अध्ययन किया। इन सबने अन्य देशों के संविधानों का अध्ययन किया। अपने देश को सामाजिक, राजनैतिक स्थितियों  का अध्ययन किया और तब जाकर संविधान का निर्माण हुआ।
रामू:-       इतनी पढाई के लिए रुपए की भी तो आवश्यकता होगी। क्या ये सभी धनाढ्य परिवारों से थे ?
अध्यापक:-   नहीं, सभी धनाढ्य परिवारों से नहीं थे ? डाॅ भीमराव अम्बेडकर तो ऐसे परिवार से थे जो                        बहुत  गरीब था और जिन्हें एक सामाजिक बुराई के कारण अछूत समझा जाता था। उन्हें तो                  प्रारम्भ में कक्षा में बैठकर भी पढने की अनुमति नहीं थी।
रोहन:-       तब उन्होंने पढाई कैसे की ?
अध्यापक:-    मेहनत और लगन से, स्वाध्याय सें जब उन्हें कक्षा में बैठने नहीं दिया गया वे कक्षा के बाहर                     बैठकर पढ़ते थे| उनकी मेहनत और शिक्षा के प्रति लगाव देखकर सया जी राव ने उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान की और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैण्ड भेज दिया। वहां भी उन्होंने लगन से पढ़ाई पूरी कर उन्होंने सिद्ध किया  कि कितनी भी विषम परिस्थितियां हो, व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं रोक सकती हैं।
सुरेश:-      गुरु जी! क्या संविधान में सभी नियम कानून हैं ?
अध्यापक:-   हां, हमारे संविधान में उन सभी नियमों और कानूनों का संक्षिप्त रूप है जिसके आधार पर शासन व्यवस्था चलती है। संसद उन संक्षिप्त रूपों के अनुरूप ही कोई कानून बना सकती है जो  कानून  संविधान के अनुरुप नही होते हैं उन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित कर दिया जाता है।
रोहन:-       गुरु जी! संविधान बनाने की आवश्यकता क्यों हुई ?
अध्यापक:-    क्योंकि संविधान लागू होने से पूर्व देश 600 से भी अधिक राज्यों में बंटा था, जहां के राजा                        मनमाना कानून बनाते थे। देश का शासक जनता के द्वारा चुना गया प्रतिनिधि नहीं होता था बल्कि राजा का बेटा ही राजा होता था | लोगों पर अत्याचार किया जाता था। जातिवाद, सम्प्रदायवाद फैला हुआ था। इन समस्याओं के कारण हमारा देश गुलाम हुआ था। इन समस्याओं को समाप्त करने के लिए ही संविधान का निर्माण हुआ था।
   महेश:-  तो क्या  संविधान मे इन समस्याओं का समाधान किया गया है ?
अध्यापक:-    हां, संविधान निर्माताओं ने प्रस्तावना में ही स्पष्ट कर कर दिया है कि भारत समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतन्त्रात्मक गणराज्य होगा। सभी  व्यक्तियों को चाहे वह महिलाएं ही क्यों न हो, सामाजिक, राजनैतिक आर्थिक समानता प्रदान की जाएगी। समानता प्रदान करने के लिए कई कानून भी बनाए गए हैं।
रामू:-   गुरु जी! क्या नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों की भी व्यवस्था भी संविधान में की गई है ?
अध्यापक:     हां, नागरिकों और उनके सुरक्षा और अधिकारों की व्यवस्था भी संविधान में की गई है।
संरेश:-      गुरुजी! क्या भ्रष्टाचार, रिश्वत के विरुद्ध भी व्यवस्था की गई है ?
अध्यापक:-    हां भई, की गई है। सभी समस्याओं के समाधान  के लिए व्यवस्था की गई है।
महेश:-       गुरु जी! जब सभी समस्याओं के समाधान के लिए कानून बनाए गए हैं तब हमारे देश में                    भ्रष्टाचार, रिश्वत, दहेज, प्रदूषण जैसी समस्याएं क्यों बढ रहीं हैं ?
अध्यापक:-    क्योंकि हम अपने प्राप्त अधिकारों को जानना नहीं चाहते और न ही कर्तव्यों का पालन करना चाहते हैं। जब हमें संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का ज्ञान होगा तब हम उन अधिकारों को प्राप्त करने के लिए कानून की मदद ले सकते हैं और जब कर्तव्यों का पालन  करेंगे तब राष्ट्र और उसके नागरिकों की सुरक्षा हो सकेगी। राष्ट् की समस्याएं केवल कानून बना देने से ही समाप्त नहीं हो जाती बल्कि नागरिकों सहयोग भी मिलना आवश्यक होता है नागरिको  के सहयोग के बिना राष्ट्र की समस्याएं कभी समाप्त नहीं  होगी। इसलिए हम सबकों संविधान की सफलता में सहयोग करना चाहिए संविधान की सफलता के लिए अधिकार और कर्तव्य का ज्ञान आवश्यक है।

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