प्रयागराज बाल आयोग की सदस्य निर्मला सिंह पटेल ने प्रयागराज जनपद के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर बाल अधिकारों की जांच की। इस दौरान उन्होंने अधीनस्थों को निर्देशित करते हुए बच्चों को शिक्षित करने का निर्देश दिया है। बाल आयोग की सदस्य निर्मला सिंह पटेल ने सर्वप्रथम सरोजिनी नायडू चिकित्सालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण में एनआरसी तो सही पाया गया परंतु पीकू वार्ड में काफी गंदगी दिखी। साथ ही बाहरी लोगों का आना - जाना बिना मास्क के प्रवेश करना इन बातों को लेकर सदस्य ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें तथा बिना मास्क के कोई भी अंदर प्रवेश ना करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के माता-पिता के अलावा बाहरी कोई भी व्यक्ति अंदर ना आए। इस बात का ध्यान चिकित्सालय के जिम्मेदार रखें।इसके पश्चात सदस्य बाल आयोग निर्मला सिंह पटेल ने बालगृह का निरीक्षण करते हुए कहा बच्चों को गोद लेने का जो प्रावधान है उसमें थोड़ी सरलता बरतनी चाहिए जो बच्चों को 5 साल की आयु में गोद दिया जाता है वह 5 वर्ष को घटाकर 3 माह होना चाहिए क्योंकि 5 वर्ष के बच्चे को संपूर्ण जानकारी हो जाती है और वह कहीं भी जाता है तो इस बात से कुंठित रहता है कि यह मेरे असली मां बाप नहीं है। पता नहीं मेरे मां बाप कौन हैं क्यों अनाथालय छोड़ गए वही यदि 3 माह के बच्चे को गोद लिया जाए तो बच्चे को यह जानकारी नहीं होगी कि यह मेरे असली मां-बाप है या नहीं है या मैं कहीं बाहर से आया हूं, उसके लिए वही असली मां-बाप वही उसका परिवार होगा जो बच्चे के भविष्य को शुनियोजित तरीके से सुनिश्चित करेगा इससे बच्चे के दिमाग में किसी प्रकार की कुंठा नहीं रहेगी और वह अपने उसी परिवार से संपूर्ण जीवन खुशी पूर्वक व्यतीत करेगा। सदस्य बाल आयोग ने कहा कि हर जनपद में कम से कम एक बालमित्र थाना होना ही चाहिए जिससे बाल अपराध में कमियां आ सकती है। उन्होंने कहा कि साथ ही बच्चों के मन में जो पुलिस का डर बैठा रहता है वह भी कम होगा जब यदि उनके साथ मित्रवत व्यवहार किया जाएगा। सदस्य बाल आयोग निर्मला सिंह पटेल ने कहा कि हमने देखा है कि अक्सर चौराहों पर जो बच्चे भीख मांगते दिखते हैं या कुछ सामान बेचते हुए दिखते हैं भिछा वृत्ति के शिकार हैं उन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है उनका रेस्क्यू करते हुए उनका उचित भविष्य सुनिश्चित करने की जरूरत है। इस पर आम सामाजिक कार्यकर्ता भी सहयोग कर सकते हैं जिससे हमारे देश के भविष्य हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें। ऐसे बच्चों की जानकारी दी जाए जिससे उनका सहयोग किया जा सके। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से कहा कि यदि उनके आसपास कोई भी पेरेंट्स बाल मजदूरी करवाता है या कोई दुकानदार करवाता है जो सामाजिक कार्यकर्ता उसकी शिकायत बाल आयोग में कर सकते हैं। पैसे के अभाव में किसी भी बच्चे की शिक्षा अधूरी नहीं होनी चाहिए। इस दौरान महिला अधिकार एवं जागृति संस्थान की अध्यक्ष अंजना मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहें।
शुक्रवार, 6 जनवरी 2023
हर जनपद में कम से कम एक बालमित्र थाना होना ही चाहिए- सदस्य बाल आयोग
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